khabar abhi tak

पत्रकारों पर एफआईआर से पहले जाँच अनिवार्य, एमपी हाईकोर्ट ने पत्रकार को दी राहत, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल


जबलपुर।
 मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बैतूल जिले के पत्रकार आशीष वर्मा को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने पत्रकार के विरुद्ध दर्ज शासकीय कार्य में बाधा और लोक सेवक पर हमले के मामले में उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की है।बैतूल के रानीपुर पुलिस थाने में पत्रकार आशीष वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 119(1), 132 और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस और अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आवेदक ने प्रशासनिक अधिकारियों को उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन में न केवल रोका, बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार और आक्रमण भी किया।

समाचार संकलन के दौरान दर्ज हुई थी FIR

​बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह से निराधार है। घटना वाले दिन रानीपुर क्षेत्र में धान तुलाई में अनियमितताओं को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे थे। आशीष वर्मा एक पंजीकृत पत्रकार के रूप में वहां केवल समाचार संकलन (Reporting) के लिए पहुंचे थे। उन्होंने किसी पर हमला नहीं किया और न ही वे घटना की शुरुआत में वहां मौजूद थे। यह भी तर्क दिया गया कि घटनास्थल पर मौजूद भीड़ में से केवल पत्रकार को निशाना बनाया गया।

गाइडलाइंस की अनदेखी और प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला

​न्यायालय में दलील दी गई कि राज्य शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पत्रकारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले अनिवार्य रूप से प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया। यह सीधे तौर पर प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता न मानते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak