बालाघाट। एमपी के बालाघाट स्थित खैरलांजी में रहने वाले प्रसन्नजीत रंगारी को सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा कर दिया गया है। 31 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए सात भारतीय कैदियों में उनका नाम भी शामिल है। वर्षों से उनकी वतन वापसी के लिए संघर्ष कर रहीं बहन संघमित्रा के प्रयास आखिरकार रंग ले आए। परिवार अब उन्हें लेने के लिए अमृतसर जाने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तान की जेल में प्रसन्नजीत को सुनील अदे के नाम से बंद रखा गया था। 1 अक्टूबर 2019 को उन्हें पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया था। दिसंबर 2021 में इसकी जानकारी सामने आने के बाद से संघमित्रा लगातार प्रशासन और विभिन्न माध्यमों से भाई की रिहाई के लिए प्रयासरत थीं। अटारी-वाघा बॉर्डर पर कस्टम व इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रसन्नजीत को अमृतसर के रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड व गुरु नानक देव अस्पताल में रखा गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने प्रशासन से मदद मांगी थी। उन्हें सहायता का आश्वासन मिला था। कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि प्रशासन से परिवार ने मदद मांगी थी। जिसके बाद ग्राम सचिव के साथ उसके परिजनों का टिकट कराया जा रहा है।
सालों बाद सुनी भाई की आवाज-
1 फरवरी को खैरलांजी थाना पुलिस से फोन आने पर परिवार को रिहाई की जानकारी मिली। इसके बाद अमृतसर थाने से आए कॉल पर संघमित्रा ने वर्षों बाद अपने भाई की आवाज सुनी। इस दौरान भावनात्मक माहौल बन गया। प्रसन्नजीत के लापता होने के बाद उनके पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो चुका है।
2017 में लापता हुआ था युवक-
प्रसन्नजीत 2017 में घर से लापता हो गए थे। वह कुछ समय बिहार गए और लौटे भी लेकिन बाद में दोबारा गायब हो गए। परिजनों ने काफी तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला और उन्हें मृत मान लिया गया था। दिसंबर 2021 में अचानक आए फोन से परिवार को पता चला कि वे पाकिस्तान की जेल में बंद हैं।
बेटे की रिहाई की खबर से मां की आंखे से आंसू छलके-
बेटे की रिहाई की खबर सुनते ही मां की आंखों से आंसू छलक आए। बेटे की वापसी की खुशी के साथ उसकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता भी है। सात साल बाद परिवार का इंतजार खत्म हुआ है लेकिन बीते वर्षों का दर्द भी चेहरों पर साफ दिखता है।
जबलपुर के खालसा कालेज में की बी फार्मेसी पढ़ाई-
खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत पढ़ाई में तेज थे। पिता ने कर्ज लेकर उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी फार्मेसी की पढ़ाई कराई। वर्ष 2011 में उन्होंने एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई करना चाहते थे। लेकिन मानसिक स्थिति बिगडऩे के कारण पढ़ाई छोड़कर घर लौट आए।