जबलपुर। मध्यप्रदेश की एटीएस ने देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कोलकाता से पांच अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपियों पर जबलपुर के पते का उपयोग कर फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाने का गंभीर आरोप है। रविवार को आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उन्हें 25 फरवरी तक की रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस रैकेट के तार और भी गहरे हो सकते हैं।
सूदखोरी का धंधा और पासपोर्ट की डील
पकड़े गए आरोपियों की पहचान जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान के रूप में हुई है। प्राथमिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ये सभी आरोपी कई साल पहले अवैध रूप से भारत आए थे और कोलकाता को अपना ठिकाना बना लिया था। वहां ये सभी सूदखोरी के धंधे में लिप्त थे। भारतीय नागरिकता का जाली ठप्पा लगवाने के लिए इन सभी ने जबलपुर में लंबे समय से रह रहे अफगानी नागरिक सोहबत खान से संपर्क साधा। सोहबत खान ही वह मुख्य कड़ी है, जिसने इन विदेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने का जिम्मा उठाया था। बताया जा रहा है कि इस काम के लिए प्रत्येक व्यक्ति से ढाई लाख रुपये वसूले गए थे।
2024 में जबलपुर में रची गई साजिश
जांच दल के अनुसार, इन आरोपियों को पूरी योजना के तहत साल 2024 में जबलपुर बुलाया गया था। यहां सोहबत खान ने स्थानीय प्रभाव और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके आवेदन जमा कराए। हैरानी की बात यह है कि इन विदेशी नागरिकों ने 'पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र' पहुंचकर बाकायदा अपनी फोटो खिंचवाई और दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया। सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर इन आरोपियों ने जबलपुर के फर्जी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, ताकि इन्हें आसानी से भारतीय पासपोर्ट जारी किए जा सकें।
सरकारी तंत्र और बिचौलियों की मिलीभगत
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एटीएस ने अगस्त 2025 में छोटी ओमती क्षेत्र से मुख्य आरोपी सोहबत खान को दबोचा। उसकी निशानदेही पर परत दर परत इस गिरोह के चेहरे सामने आने लगे। जांच में केवल विदेशी ही नहीं, बल्कि भारतीय मददगार भी रडार पर आए हैं। गिरफ्तार होने वालों में कोलकाता निवासी मोहम्मद इकबाल और अकबर के अलावा जबलपुर के कुछ स्थानीय लोग भी शामिल हैं। इनमें शंकर शाह नगर का कथित अधिवक्ता चंदन सिंह, विजय नगर में पदस्थ वन रक्षक दिनेश गर्ग और कटंगा निवासी महेश सुखदान के नाम प्रमुख हैं। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने अपने पदों और प्रभाव का दुरुपयोग कर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने में सोहबत खान की मदद की थी। वर्तमान रिमांड अवधि के दौरान एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन पासपोर्ट्स का इस्तेमाल किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि के लिए किया जाना था।
