पीडि़त ग्राम सचिव आशीष कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2024 में ग्राम पंचायत बसाड़ी में पदस्थ रहते हुए उन पर लोकायुक्त की कार्रवाई हुई थी, जिसमें उन्हें सह-आरोपी बनाया गया था। इसके छह महीने बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अपनी बहाली के लिए आशीष दुबे ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने 30 दिनों के भीतर मामले का निराकरण करने का निर्देश दिया था। इसके एक साल बीत जाने पर भी लेखपाल सत्येंद्र सोनी ने उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ाई और मोबाइल फोन की मांग पर अड़ा रहा। ग्राम सचिव द्वारा असमर्थता जताने और अनुरोध करने के बादए आरोपी किस्तों में पैसे लेने पर सहमत हो गया। आशीष कुमार ने इस बात की शिकायत जबलपुर पहुंचकर लोकायुक्त एसपी से की, इसके बाद आज जिला पंचायत आफिस की स्थापना शाखा पहुंचकर लेखापाल सत्येन्द्र सोनी को पांच हजार रुपए की रिश्वत दी। तभी लोकायुक्त टीम के दबिश देकर रंगे हाथ पकड़ लिया। गौरतलब है कि कटनी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह नौ दिनों के भीतर लोकायुक्त की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 17 फरवरी को जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री व्हीए सिद्दीकी को 20000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। वह मामला सेवानिवृत्त चौकीदार कुंवर लाल रजक और नौ अन्य कर्मचारियों के ?8 लाख के बकाया एरियर्स के भुगतान के बदले 50000 की रिश्वत मांगने से संबंधित था।