नगर संगठन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने आरोप लगाया कि राजमार्ग के एक हिस्से का निर्माण कुछ ही महीने पहले दिसंबर में किया गया था, लेकिन घटिया गुणवत्ता के कारण वह टिक नहीं सका। जिसके चलते सड़क को दोबारा बनाना पड़ा। यही कारण है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस रोड का प्रतिदिन लाखों लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है। यह तो अच्छा है कि कोई जनहानि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुणवत्ता जांच के दावों के बावजूद सड़क का बार-बार खराब होना अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करता है। मध्य भारत मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गईए तो एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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