जबलपुर। मध्य प्रदेश के भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे -45 पर बना करोड़ों का ओवरब्रिज अपनी बदहाली को लेकर विवादों के घेरे में है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पुल महज तीन साल के भीतर ही जर्जर हो गया है। पुल की संरचनात्मक कमजोरी और तकनीकी खामियों ने न केवल सिस्टम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रदेश की सियासत में भी उबाल ला दिया है। राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्खा ने इस मामले को भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण: सिस्टम पर उठे सवाल
सांसद विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि यह पुल निर्माण में हुई व्यापक धांधली का उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि महज 3 साल में पुल का जर्जर होना किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं, बल्कि घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी का परिणाम है। तन्खा ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन की इस तरह बर्बादी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसी छोटे कर्मचारी को 'बलि का बकरा' बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिशें नाकाम की जाएंगी।
जनता के टैक्स का पैसा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। 400 करोड़ जैसे बड़े बजट के बावजूद पुल की ऐसी स्थिति ने इंजीनियरिंग निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की पोल खोल दी है। जनता का सवाल है कि क्या ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए मानकों को ताक पर रखा गया? जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते यह मामला सामने न आता, तो यहाँ किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती थी। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा था?
'निलंबन नहीं, जेल हो', स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग
श्री तन्खा ने इस मामले में केवल प्रशासनिक निलंबन को नाकाफी बताया है। उन्होंने मांग की है कि-
- निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
- पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
- प्रदेश के सभी नए बने ओवरब्रिज का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को सख्त कानूनी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
