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पटना-इंदौर एक्सप्रेस का कोच अटेंडेंट निकला कछुआ तस्कर, दो बैग में 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल मिले

 भोपाल। पटना-इंदौर एक्सप्रेस 19322 के एच-1 कोच का अटेंडेंट कछुआ तस्कर निकला। तलाशी के दौरान आरपीएफ ने उसके दो बैग से 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल बरामद किए हैं।

                               आरपीएफ की टीम ट्रेन में अवैध शराब को लेकर सर्चिंग कर रही थी। इस दौरान कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार की संदेह के आधार पर तलाशी ली। उसके पास दो बैग रखे थे, जिनमें छोटे-छोटे जीवित कछुए पाए गए। आरपीएफ के अनुसार कोच अटेंडेंट अजय मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है। वह करीब चार साल से ट्रेन में बतौर अटेंडेंट काम कर रहा है। यह नौकरी उसे निजी एजेंसी के जरिए मिली थी। जिसके पास वेस्टर्न रेलवे के इस रेक के मेंटेनेंस और स्टाफ सप्लाई का ठेका है। आरोपी बीच में कुछ समय के लिए काम छोड़ चुका था। बाद में दोबारा इसी ट्रेन में ड्यूटी पर लौट आया।


देवास-इंदौर में देनी थी डिलीवरी-

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे लखनऊ में एक व्यक्ति ने दो बैग सौंपे थे। कहा था कि एक बैग देवास और दूसरा इंदौर में सौंपना है। देवास में बैग देने पर एक हजार और इंदौर में दूसरे बैग के लिए पंद्रह सौ रुपए मिलने थे। आरोपी ने पूछताछ में कहा कि रुपयों के लालच में आकर उसने ये काम किया। यह उसकी पहली तस्करी थी। 

निजी केबिन-बेडरोल स्टोरेज के बीच में छिपाया-

आरोपी अजय फर्स्ट एसी कोच का अटेंडेंट था। कोच में उसके पास निजी केबिन और बेडरोल स्टोरेज की सुविधा थी। दोनों बैग उसी सामान के बीच रखे गए थे। आरपीएफ की कैजुअल लेबर और स्टाफ की रूटीन चेकिंग चल रही थी।

एक कछुआ की 2-5 हजार-

इक्वेरियम कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि छोटे कछुओं की कीमत बाजार में करीब दो हजार से पांच हजार रुपए तक होती है। ये कछुए एक्वेरियम शौक के नाम पर खरीदे जाते हैं। जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, कीमत भी बढ़ जाती है। 311 कछुओं की यह खेप अवैध बाजार में लाखों रुपए की हो सकती थी। हालांकिए वन विभाग का कहना है कि संरक्षित वन्य जीव होने के कारण इनकी कोई कानूनी कीमत तय नहीं की जा सकती। 


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