एके-47 वाली फोटो से शुरू हुई थी जांच-
इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ उस वक्त शुरू हुआ, जब मुख्य आरोपी सोहबत खान ने सोशल मीडिया पर एके-47 राइफल के साथ अपनी फोटो पोस्ट की थी। अगस्त 2025 में उसकी गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने कडिय़ां जोडऩा शुरू किया। सोहबत 2015 में भारत आया था और जबलपुर में निकाह कर यहीं बस गया था। एटीएस ने जबलपुर में इसी जगह से अफगानी नागरिक सोबहत खान को अरेस्ट किया था।
2015 में भारत आकर जबलपुर में निकाह किया-
एटीएस की जांच में यह बात भी सामने आई कि सोहबत खान 2015 में पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत आया। इसके बाद भोपाल होते हुए जबलपुर पहुंचा। यहां आठ नल छोटी ओमती क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से उसने निकाह किया और यहीं रहने लगा। पिछले करीब दस सालों में उसने जबलपुर में रहकर निजी काम किए।
सोहबत खान ने अकबर का पासपोर्ट बनवाकर शुरु किया फर्जी काम-
एटीएस को यह भी पता चला कि सोहबत खान ने सबसे पहले अकबर नाम के एक व्यक्ति का पासपोर्ट बनवाने की डील की। इसके लिए दो से ढाई लाख रुपए लिए गए। गिरोह के सदस्य दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान व चंदन सिंह ने जबलपुर के फर्जी पते पर अकबर के निवास और पहचान दस्तावेज तैयार कराए। पासपोर्ट सेवा केंद्र में सत्यापन के लिए अकबर को जबलपुर बुलाया गया। जहां उसने फोटो व दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की। पासपोर्ट जारी होने के बाद गिरोह ने पोस्टमैन को 3 हजार रुपए देकर रास्ते में ही पासपोर्ट ले लिया।
इन शासकीय कर्मी व अन्य साथियों को पहले किया था गिरफ्तार-
फर्जी पासपोर्ट मामले में एटीएस ने अगस्त 2025 में ही कोलकाता निवासी मोहम्मद इकबाल, अकबर जबलपुर निवासी कथित अधिवक्ता चंदन सिंह, वन विभाग कर्मचारी दिनेश गर्ग व महेंद्र कुमार सुखदान को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने में सहयोग किया। अब तक कुल 11 गिरफ्तार हो गए है। एटीएस अब पूरे नेटवर्कए अन्य विदेशी नागरिकों और शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।