महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैंए लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैंए जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। आज हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा। करीब छह महीने पहले इंदौर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास है। अदालत ने कहा कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को अनुमति देते हैंए तो उसे वीआईपी माना जाएगा।
ढाई साल से बंद है गर्भगृह-
4 जुलाई 2023 को सावन महीने में आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 11 सितंबर 2023 तक बंद कर दिया गया था। उस समय मंदिर समिति ने कहा था कि सावन माह के समाप्त होते ही गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद गर्भगृह खुला नहीं है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में रोजाना 20 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे। अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या चार गुना बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई।
सांसद-महापौर ने भी उठाई मांग-
4 जुलाई 2023 से पहले श्रद्धालुओं को 1500 रुपए की रसीद काटकर गर्भगृह में अभिषेक व पूजा-अर्चना करने की अनुमति मिलती थी। वर्तमान में गणेश मंडप, कार्तिकेय मंडप व नंदी हॉल से दर्शन कराए जा रहे हैं। लेकिन आम श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। उज्जैन के मौजूदा सांसद अनिल फिरोजिया ने भी गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने की मांग की थी। उन्होंने पत्र जारी किया। सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस पर कदम उठाने का अनुरोध किया। दो हफ्ते पहले उज्जैन के महापौर ने भी दर्शन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन दिलाने की मांग की।
