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PWD में आर-पार की जंग: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस से घबराए इंजीनियर, निरीक्षण के विरोध में हड़ताल की चेतावनी


जबलपुर।
मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर विभाग और इंजीनियरों के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है। विभाग द्वारा शुरू किए गए औचक निरीक्षण के दूसरे चरण ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। एक ओर जहाँ सॉफ्टवेयर आधारित रैंडम चेकिंग से गड़बड़ियाँ पकड़ी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इंजीनियरों के गुट ने लामबंद होकर काम बंद करने की धमकी दे दी है। जबलपुर, जो कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का गृह जिला है, इस समय इस प्रशासनिक खींचतान का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

इंजीनियरों और ठेकेदारों का दोहरा दबाव

​विभाग की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 83 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 7 को निलंबित कर दिया गया है। विभाग की 'जीरो टॉलरेंस' नीति से नाराज इंजीनियर अब निरीक्षण की प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि पर्दे के पीछे से ठेकेदार भी इंजीनियरों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी हो, गुणवत्ता से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

कंसल्टेंसी के खेल में 200 करोड़ का वारा-न्यारा

​जांच के दौरान केवल निर्माण कार्यों में ही नहीं, बल्कि कंसल्टेंसी नियुक्तियों में भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। मापदंडों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को उपकृत किया गया, जिसके तहत अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक के काम बांटे गए। इस मामले में विभाग ने 12 कंसल्टेंटों को नोटिस जारी किए हैं और एक को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। पिछले 11 महीनों में 800 कार्यों की जांच में मिली 274 तकनीकी खामियों में से केवल 15 में ही सुधार किया गया है, जो ठेकेदारों की मनमानी को दर्शाता है।

सॉफ्टवेयर तय कर रहा छापेमारी की लोकेशन

​भ्रष्टाचार रोकने के लिए विभाग ने मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम कर दिया है। अब हर महीने की 5 और 15 तारीख को होने वाले औचक निरीक्षण की जगह और अधिकारी का चयन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए रैंडम तरीके से होता है। निरीक्षण से महज तीन दिन पहले तक किसी भी चीफ इंजीनियर को यह पता नहीं होता कि उसे किस जिले की जांच करनी है। इस डिजिटल सख्ती के कारण अब निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से लैब, मशीनरी और तकनीकी स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है।

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