शिकारपुरा की शराब फैक्ट्री को NGT ने रिपोर्ट के आधार पर दी क्लीनचिट, निगरानी जारी रहेगी


जबलपुर
। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, केंद्रीय क्षेत्र पीठ भोपाल ने छतरपुर जिले के नौगांव में स्थित मेसर्स जगपिन ब्रुअरीज लिमिटेड (कॉक्स इंडिया डिस्टिलरी) के खिलाफ चल रहे प्रदूषण मामले का निपटारा कर दिया है। एनजीटी ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस इकाई द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की जांच के आदेश दिए थे।

निरीक्षण में मिली क्लीनचिट, हटा लिया गया कचरा

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति ने नवंबर 2025 में फैक्ट्री का स्थलीय निरीक्षण किया था। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पूर्व में खुले में रखा गया डिस्टिलरी वेट ग्रेन सॉल्युबल अब हटा दिया गया है। समिति को मौके पर किसी भी प्रकार की दुर्गंध, वायु या जल प्रदूषण के साक्ष्य नहीं मिले हैं। साथ ही, आसपास के ग्रामीणों के पेयजल की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप पाई गई है।

अक्टूबर 2025 में हुई थी कार्रवाई

​रिकॉर्ड के अनुसार, नियमों के उल्लंघन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अक्टूबर 2025 में इस फैक्ट्री को बंद करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा सुधारात्मक कदम उठाए जाने और मानकों को पूरा करने के बाद यह रोक हटा ली गई थी। वर्तमान में इस डिस्टिलरी के पास 31 अक्टूबर 2028 तक संचालन के लिए वैध सहमति मौजूद है। ट्रिब्यूनल ने माना कि वर्तमान स्थिति में सुधार हुआ है, इसलिए आवेदन को आगे चलाने की आवश्यकता नहीं है।

इन शर्तों का पालन करना होगा अनिवार्य

​प्रकरण को समाप्त करते हुए एनजीटी ने परियोजना संचालक को भविष्य के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। फैक्ट्री को अपने ड्रायर और मल्टी इफेक्ट इवैपोरेटर का प्रभावी संचालन करना होगा। साथ ही परिसर की बाउंड्री वॉल की मरम्मत और पर्यावरणीय संतुलन के लिए सघन पौधरोपण करने के निर्देश दिए गए हैं। एनजीटी ने एमपीपीसीबी को निर्देशित किया है कि वह इकाई की निरंतर निगरानी करे और शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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