जबलपुर। पूर्व महापौर प्रभात साहू और एक पुलिसकर्मी के बीच हुए विवाद का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को सुरक्षा कैसे देंगे? कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को पुलिस विभाग का मनोबल गिराने वाला बताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, लार्डगंज थाना प्रभारी को आगामी 20 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और दोनों एफआईआर की केस डायरी पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
सवाल: वीडियो सबूत के बावजूद 'अज्ञात' पर एफआईआर क्यों
अधिवक्ता मोहित वर्मा द्वारा दायर याचिका में पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, 18 सितंबर 2025 को बल्देवबाग चौक पर हेलमेट चेकिंग के दौरान पूर्व महापौर और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी के बीच विवाद हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि पूर्व महापौर पुलिस स्टाफ के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और हाथापाई की कोशिश की गई। कोर्ट ने हैरानी जताई कि वीडियो साक्ष्य होने और आरोपी की पहचान स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस ने 'अज्ञात' के खिलाफ मामला क्यों दर्ज किया और नेताओं के नाम एफआईआर में क्यों नहीं जोड़े गए? याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोषी पर कार्रवाई करने के बजाय, ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी को ही सस्पेंड कर दिया गया और उल्टा उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की गई है।
