आरक्षण में बदलाव करने पर रेलवे बोर्ड चेयरमैन को नोटिस, एससी-एसटी की जगह अल्पसंख्यकों को दी प्राथमिकता

 
नई दिल्ली। 
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नोटिस जारी किया है। शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि 2010 में आईआरसीटीसी में एक नीति लागू की गई थी, जिसके तहत कैटरिंग और सर्विस टेंडरों से संबंधित आरक्षण श्रेणी संरचना में परिवर्तन किए गए थे, जो संविधान में निहित समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।

शिकायतकर्ता महाराष्ट्र के विनय जोशी ने एनएचआरसी से आवश्यक निर्देश जारी करने और ऐसी नीति को तुरंत समाप्त करने का आग्रह किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2010 में भारतीय रेलवे कैटरिंग और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) में एक टेंडर नीति लागू की गई थी, जिसे तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने पेश किया था। इसके तहत कैटरिंग और सर्विस टेंडरों की आरक्षण संरचना में परिवर्तन किए गए।

आरक्षण कम करने का आरोप

उन्होंने यह आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता के नाम पर एससी/एसटी/ओबीसी श्रेणियों के लिए निर्धारित आरक्षण को कम कर दिया गया और मुस्लिम समुदाय को अलग से आरक्षण लाभ दिया गया। एनएचआरसी ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीडि़तों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं। इस मामले की कार्यवाही पांच जनवरी को हुई। एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने के लिए रेलवे अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। 

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