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सीएम हेल्पलाइन:निराकरण की राह में 'संतुष्टि' का रोड़ा


जबलपुर में 181 की शिकायतों को बंद कराने के लिए मशक्कत कर रही पुलिस

जबलपुर। जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर आने वाली शिकायतों के निराकरण को लेकर पुलिस प्रशासन अब और अधिक सक्रिय हो गया है। हालिया आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण थाना क्षेत्रों में लंबित (पेंडिंग) शिकायतों की संख्या फिलहाल अधिक है।

​हर महीने 500 से अधिक शिकायतें

​जिले में प्रतिमाह औसतन 500 से 550 नई शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराई जा रही हैं। इनमें से लगभग 75% से 80% शिकायतों का निराकरण समय सीमा के भीतर किया जा रहा है, लेकिन शेष शिकायतें विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से लंबित रह जाती हैं। कई मामलों में तो शिकायतकर्ता एक नंबर से समाधान न मिलने पर दूसरे मोबाइल नंबर से पुन: शिकायत दर्ज करा देते हैं, जिससे डेटा का भार और बढ़ जाता है।

​पुलिस के सामने चुनौतियां और 'संतुष्टि' का पेंच

​रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मामलों में आ रही है जहाँ समस्या का समाधान तो हो चुका है, लेकिन फरियादी ने अपने मोबाइल से 'संतुष्टि' का मैसेज (एल-1 क्लोजर) नहीं भेजा है। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मी फरियादियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि आधिकारिक रूप से शिकायत बंद हो सके। विशेष रूप से पारिवारिक विवाद और अचल संपत्ति (जमीन-मकान) के बंटवारे से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा सिरदर्द बनी हुई हैं। कई बार दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत कर देते हैं, जिससे निष्पक्ष निराकरण में समय लगता है।

​ग्रेडिंग सुधारने के लिए विशेष अभियान

​जिले के एसडीओपी, डीएसपी और सीएसपी स्तर के अधिकारी स्वयं प्रकरणों की समीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कमजोर वर्गों, महिलाओं और बुजुर्गों की शिकायतों पर विशेष संवेदनशीलता बरतें। शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष शिविर (कैंप) लगाने का भी प्रावधान किया गया है ताकि फरियादियों को भटकना न पड़े।

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