एमपी आबकारी नीति 2026-27:नई आबकारी नीति में 1915 के पुराने अधिनियम में बड़े बदलाव की तैयारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश सरकार अपनी नई आबकारी नीति (2026-27) को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए आबकारी अधिनियम 1915 की पुरानी धाराओं में संशोधन करने जा रही है। शुक्रवार को भोपाल में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस पर मंथन किया गया। इस प्रस्तावित संशोधन में सबसे बड़ा बदलाव शराब दुकानों और बार परिसरों में नाच-गाने और संगीत कार्यक्रमों को लेकर हो सकता है।
नाच-गाने पर छूट या भारी जुर्माना?
वर्तमान नियमों के अनुसार, शराब दुकानों या लाइसेंस प्राप्त बार परिसरों में नाच-गाने और मनोरंजन कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक है। हालांकि, हकीकत में कई जगहों पर ऐसे आयोजन हो रहे हैं। सरकार अब दो विकल्पों पर विचार कर रही है: या तो इन गतिविधियों को वैध कर इसके लिए विशेष अनुमति दी जाए, या फिर प्रतिबंध को सख्त रखते हुए वर्तमान जुर्माने की राशि को कई गुना बढ़ा दिया जाए।
जहरीली शराब पर सख्त रुख
बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि जहरीली शराब की घटनाओं से सरकार की छवि खराब होती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यदि किसी जिले में ऐसी घटना दोबारा होती है, तो इसके लिए संबंधित जिला आबकारी अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
क्या कहती है वर्तमान कानून की धारा 38
मध्य प्रदेश उत्पाद शुल्क अधिनियम 1915 की धारा 38 के तहत वर्तमान में किसी भी लाइसेंस प्राप्त परिसर में शराब पीकर हंगामा करना, नाचना, गाना, संगीत बजाना या जुआ खेलना प्रतिबंधित है। इस नियम का उल्लंघन करने पर फिलहाल न्यूनतम 100 से लेकर अधिकतम 2000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जिसे अब बढ़ाने की तैयारी है।
