सामूहिक दुष्कर्म के वक्त युवती ने आवाज क्यों नहीं की, गैंगरेप के केस में उठी कई दलीलें


जबलपुर
। जबलपुर के बहुचर्चित गोराबाजार सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण मामले में पॉक्सो की विशेष अदालत ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव और विरोधाभासों के चलते सभी 6 आरोपियों को बालिग युवती से दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया है। अभियोजन के अनुसार, 9 सितंबर 2021 को गोराबाजार थाने में एक महिला ने अपनी बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। 10 सितंबर को बरामदगी के बाद युवती ने आरोप लगाया था कि सागर मिश्रा ने उसे शादी का झांसा देकर बुलाया और अपने दोस्तों के साथ मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस मामले में निक्की उर्फ निकलेश, दिलीप उर्फ दीपक, शाहिद खान, अफजल उर्फ अमजद खान, सागर उर्फ बाली मिश्रा और जॉनमनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया था।

नाबालिग होने का दावा भी झूठा निकला

​विशेष न्यायाधीश निशा गुप्ता की अदालत ने सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी में कई गंभीर कमियां पाईं। मेडिकल जांच में युवती की उम्र साबित करने के लिए एक्स-रे रिपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने उसे 'नाबालिग' के बजाय 'बालिग' माना। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और न ही युवती के शरीर पर चोट के कोई निशान मिले। सबसे अहम बात यह रही कि आरोपियों का डीएनए भी युवती से मैच नहीं हुआ। पुलिस ने युवती और उसकी मां की कॉल डिटेल्स  पेश नहीं की, जिससे कथित अपहरण के बाद हुए फोन कॉल की पुष्टि हो सके। पुलिस का दावा था कि युवती को आरोपियों के कब्जे से छुड़ाया गया, लेकिन दस्तावेजों के अनुसार उसकी बरामदगी सुबह 5:30 बजे थाने में दिखाई गई, जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी दोपहर बाद हुई। क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि युवती पहले भी उमरिया जिले में इसी तरह की दो अन्य मुकदमे दर्ज करा चुकी है। यह उसकी तीसरी ऐसी रिपोर्ट थी। आरोपी निक्की की ओर से अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने दलील दी कि घटना स्थल एक घनी बस्ती में होने के बावजूद किसी ने युवती के चीखने की आवाज नहीं सुनी। अदालत ने माना कि युवती अपनी मर्जी से गई थी और अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म के आरोप झूठे पाए गए। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी छह युवकों को ससम्मान बरी कर दिया।

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