जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने अपनी विशेषज्ञता और समर्पण से एक असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। भोपाल निवासी 4 वर्षीय मासूम खुशवंत पटेल, जो 'न्यूरोब्लास्टोमा' जैसे दुर्लभ और जानलेवा कैंसर से जूझ रहा था, उसे डॉक्टरों ने मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। लोधी परिवार के इस नन्हे बालक की बीमारी का पता चलने के बाद परिजनों ने पहले निजी अस्पतालों और फिर भोपाल एम्स में संपर्क किया था, लेकिन वहां इलाज संभव न हो पाने के कारण उसे जबलपुर रेफर कर दिया गया। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में चाइल्ड कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. श्वेता पाठक और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को हाथ में लिया। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और निरंतर निगरानी के साथ करीब एक महीने तक चले गहन उपचार के बाद खुशवंत अब पूरी तरह स्वस्थ है। यह सफलता न केवल चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बढ़ती क्षमताओं और विशेषज्ञता का भी प्रमाण है।
अत्याधुनिक उपचार और टीम वर्क से न्यूरोब्लास्टोमा को हराया
न्यूरोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला एक अत्यंत गंभीर कैंसर है, जिसका इलाज समय पर न मिलने से जान का खतरा रहता है। डॉ. श्वेता पाठक के नेतृत्व में टीम ने बच्चे की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन कर तुरंत उपचार प्रक्रिया शुरू की। इलाज के दौरान न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया गया, बल्कि डॉक्टरों के संवेदनशील व्यवहार ने परिवार को वह भावनात्मक संबल दिया जिसकी उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता थी। खुशवंत के परिजनों ने डॉ. श्वेता पाठक, उनकी अनुभवी टीम और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज ने उन्हें नई उम्मीद दी है।
