नई दिल्ली. रेलवे ने आरक्षण नियमों की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसके लिए बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि आरक्षण सेल में कर्मचारियों की कमी न होने दी जाए। विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए लॉ असिस्टेंट या चीफ लॉ असिस्टेंट की तैनाती को अनिवार्य कर दिया गया है।
बोर्ड ने पाया है कि कुछ जोनल रेलवे में पुराने निर्देशों का पालन सही भावना से नहीं किया जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में ऑल इंडिया एससी/एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। इसके बाद डीजी/एचआर की अध्यक्षता में हुई बैठक के आधार पर बोर्ड ने 2023 के आदेश को फिर से दोहराया है।
आरक्षण सेल में होंगे कानूनी विशेषज्ञ
रेलवे के नए आदेश के अनुसार, आरक्षण से जुड़े अदालती मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए प्रत्येक आरक्षण सेल में एक चीफ लॉ असिस्टेंट या लॉ असिस्टेंट का पद सुनिश्चित किया जाएगा। एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए तैनात संपर्क अधिकारियों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। बोर्ड ने साफ किया है कि इन निर्देशों का पालन सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और पीएसयू को अनिवार्य रूप से करना होगा।
