एमपी स्टेट बार काउंसिल: सचिव पद से हटाई गई गीता शुक्ला को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत


 जबलपुर | मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के सचिव पद से हटाई गईं गीता शुक्ला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने गीता शुक्ला की विशेष अनुमति याचिका  को निरस्त करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें उन्हें पद से हटाने का आदेश दिया गया था।

क्या था हाई कोर्ट का फैसला

​इससे पहले, 20 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने गीता शुक्ला को सचिव पद से हटाकर वापस उनके मूल पद एलडीसी  पर भेजने के निर्देश दिए थे।सुको ने कहा कि स्टेट बार काउंसिल के सचिव का पद संवैधानिक प्रकृति का और अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।​इस पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है व ​गीता शुक्ला को दिया गया 'आउट ऑफ टर्न प्रमोशन' कानूनी रूप से वैध नहीं है।

दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करें

​यह मामला बार काउंसिल के सदस्य शैलेंद्र वर्मा, अहादुल्ला उस्मानी, हितोषी जय हार्डिया, अखंड प्रताप सिंह और अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन द्वारा दायर याचिकाओं पर आधारित था। याचिकाकर्ताओं ने 31 जनवरी 2022 और 9 जुलाई 2024 को जारी उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिसके तहत गीता शुक्ला को नियमों को दरकिनार कर पदोन्नत किया गया था।हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में नीलेश जैन को कार्यकारी सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, अदालत ने बार काउंसिल को निर्देशित किया है कि दो महीने के भीतर सचिव के पद पर नियमित और पारदर्शी तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए।

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