हाई कोर्ट ने बदले की भावना से दर्ज केस को किया निरस्त
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने न्याय और कानून के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला पकड़ते हुए मंडला जिले के बीजाडांडी थाने में दर्ज एक एफआईआर को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 80 किलोमीटर की दूरी ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई इस प्राथमिकी की सच्चाई उजागर कर दी है। मामला जबलपुर के नयागांव निवासी व्यापारी शंकर लाल गुनानी से जुड़ा है। उनके खिलाफ 14 जनवरी 2025 को ममता साहू नामक महिला ने मंडला के बीजाडांडी थाने में मारपीट और आगजनी की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि शंकर लाल ने हथियारबंद लोगों के साथ उसके घर में तोड़फोड़ की और जान से मारने की धमकी दी।
कोर्ट में ऐसे बेनकाब हुआ झूठ
जस्टिस बीपी शर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान मेडिकल रिकॉर्ड्स का बारीकी से अध्ययन किया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय मंडला में घटना बताई गई, उस समय शंकर लाल जबलपुर के एक निजी अस्पताल के में गंभीर हालत में भर्ती थे। उन्हें 13 जनवरी 2025 को सिर की गंभीर चोट के कारण अस्पताल लाया गया था। जबलपुर से मंडला के बीजाडांडी की दूरी लगभग 80 किमी है। कोर्ट ने कहा कि महज 80 मिनट के अंतराल में एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का दोनों जगहों पर मौजूद होना शारीरिक रूप से असंभव है। महिला ने दावा किया था कि अपराधी ने खुद अपना नाम और पता बताया था। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी समझदार अपराधी अपराध करते समय स्वयं की पहचान उजागर नहीं करता।
