पूर्व बिजली अफसर को 'हाई वोल्टेज' झटका: कोर्ट ने कहा,जारी रहेगा भ्रष्टाचार का ट्रायल


जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सेवानिवृत्त एडिशनल जनरल मैनेजर प्रदीप चौधरी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। अब विशेष अदालत में उनके विरुद्ध ट्रायल (मुकदमा) जारी रहेगा।

70 करोड़ की काली कमाई का आरोप

​रिटायर्ड एजीएम प्रदीप चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 70 करोड़ रुपये अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की। लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद उनके विरुद्ध 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' की विभिन्न धाराओं और आईपीसी की धारा 120-B के तहत मामला दर्ज किया था। इसी मामले में निचली अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसे चौधरी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने धारा 482 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर कर चार्जशीट और कोर्ट की कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी।

अभियोजन की मंजूरी पर कोर्ट का रुख

​प्रदीप चौधरी की मुख्य दलील यह थी कि उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी एक अयोग्य अधिकारी द्वारा दी गई है, जबकि उन्हें हटाने का अधिकार केवल मैनेजिंग डायरेक्टर के पास है। हालांकि, जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की खंडपीठ ने इस दलील को तकनीकी आधार पर स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही स्वीकृति पत्र पर जॉइंट डायरेक्टर के हस्ताक्षर हों, लेकिन उसे सक्षम प्राधिकारी यानी मैनेजिंग डायरेक्टर का अनुमोदन प्राप्त था। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि धारा 482 की शक्तियों का उपयोग वैध कानूनी कार्यवाही को रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि निचली अदालत का फैसला साक्ष्यों पर आधारित है और इसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। इस आदेश के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि करोड़ों की अवैध संपत्ति के इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी को अदालत में ट्रायल का सामना करना ही होगा।

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