MP PATHCON 2026: पैथोलॉजिस्टों ने साझा किए ओवेरियन बायोप्सी और कैंसर डायग्नोसिस के नए सूत्र,डिजिटल पैथोलॉजी और सटीक चिकित्सा,जबलपुर में विशेषज्ञों का जमावड़ा
जबलपुर। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों और पैथोलॉजी की नई दिशाओं पर चर्चा करने के लिए शनिवार को '16वीं MP PATHCON 2026' साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए। सम्मेलन में देश भर के विशेषज्ञों ने गंभीर बीमारियों के सटीक निदान और उपचार पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अशोक खण्डेलवाल ने उद्बोधन में कहा कि ये आयोजन न केवल चिकित्सा जगत बल्कि जबलपुर सहित प्रदेश के लिये मील का पत्थर साबित होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय तोतड़े ने स्वागत भाषण में कहा कि भविष्य में नए पैथोलॉजी के स्टूडेंट्स के लिये बड़ी चुनौतियां हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में दिग्गज कारपोरेट संस्थान उतर आए हैं। श्री तोतड़े ने कहा कि अगली पीढ़ी के लिये वर्तमान पीढ़ी को आगे आकर काम करना चाहिए। इसी क्रम में,मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन डॉ. राजेश तिवारी ने कहा मेडिकल कॉलेज के प्रत्येक फ्लोर पर पैथोलॉजी लैब होनी चाहिए। कार्यक्रम के सह-आयोजक सचिव डॉ. शिशिर चनपुरिया ने कहा कि इस आयोजन से नई सोच का विकास होगा,जिससे आने वाली पीढ़ियां लाभान्वित होंगी। श्री चनपुरिया ने कहा आयोजन को सफल बनाने के लिये सम्पूर्ण टीम की सराहना की जानी चाहिए। इस अवसर पर डॉ. रानू तिवारी सहित डॉ. ओपी भार्गव, डॉ. शिशिर चनपुरिया, डॉ. राजेश महोबिया,डॉ. शिव चंद्राकर, डॉ. सीमा दयाल, डॉ. विजय श्रीवास्तव, डॉ. सविता वर्मा, डॉ. नीरज सेठी, डॉ. कुलदीप बजाज, डॉ. नीरज सचदेवा, डॉ. राधिका नंदवानी और डॉ. भरत पुनासे की उपस्थिति रही।
चुनौतियां बड़ी हैं, पर हम हारेंगे नहीं
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में डॉ. पारुल जैन ने टीबी निदान के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे चिकित्सा पद्धति अब माइक्रोस्कोपी से आगे बढ़कर मॉलिक्यूलर मेडिसिन की ओर बढ़ रही है। इसी क्रम में डॉ. अविनाश गुप्ता ने वास्तविक दुनिया में एनीमिया के चुनौतीपूर्ण मामलों पर चर्चा की, जबकि डॉ. अमित वर्मा ने ओवेरियन और एड्नेक्सल बायोप्सी के सटीक डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण को समझाया।सम्मेलन के दौरान एमडीएस के मॉर्फोलॉजिकल और मॉलिक्यूलर निदान पर डॉ. मयूर परिहार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। दोपहर के सत्र में वंशानुगत एनीमिया पर डॉ. रीना दास और ऑटोइम्यूनिटी के हालिया अपडेट्स पर डॉ. अपर्णा जयराम ने व्याख्यान दिए। कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. अतिन सिंघई ने ब्लैडर कार्सिनोमा के डब्ल्यूएचओ के अपडेट्स साझा किए। वहीं, डॉ. दीपांकर बनर्जी ने 'सेप्सिस' को एक 'साइलेंट किलर' बताते हुए इसके प्रबंधन में आणविक डायग्नोस्टिक्स की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अर्जुन सिंह ने मेडिकल शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए 'गेमिफिकेशन' के सिद्धांतों और उनके अनुप्रयोगों पर जोर दिया। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य पैथोलॉजिस्टों को नई वैश्विक तकनीकों से अवगत कराना है ताकि मरीजों को बेहतर और सटीक इलाज मिल सके। कार्यक्रम में आईएपीएम के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में चिकित्सा विशेषज्ञ और पैथोलॉजी छात्र उपस्थित रहे।
कॉन्फ्रेंस से मिलेगी नई दिशा
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| डॉ. प्रियंका तिवारी (मध्य में) साथियों के साथ |
कार्यक्रम में उपस्थित शहर की वरिष्ठ डॉक्टर श्रीमती प्रियंका तिवारी ने कहा कि कॉन्फ्रेंस से पैथोलॉजी को नई दिशा मिलेगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आवश्यक हैं।
सेवा को मिला सम्मान
कार्यक्रम में मेडिकल के पैथोलॉजी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रजनी विश्नोई व डॉ.मृणालिनी एस सन्त को लाईफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। इसी क्रम में, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आये सीनियर पैथॉलोजिस्ट को सम्मानित किया गया। जिनमें,डॉ. डी. पी. लोकवानी,डॉ. हरजीत सिंह बग्गाडॉ. एस. के. पाण्डेय,डॉ. एस. जैन,डॉ. एल. के. पटेल,सविता वर्मा,डॉ. वी. श्रीवास्तव,डॉ. एस. के. चंद्राकर,डॉ. रेनू निगम,डॉ. किरण कुमार,डॉ. एन. भल्ला,डॉ. एस. के. नेमा अमल,डॉ. जी. के. नागर,डॉ. यू. एम. शर्मा,डॉ. आर. के. निगम,डॉ. वी. के. पटेल,डॉ. रजनी चौधरी,डॉ. पूजा कटियार,डॉ. के. एस. लिखार,डॉ. के. एल. आजाद,डॉ. अमर गंगवानी,डॉ. हजारी,डॉ. अमित वर्मा,डॉ. ममता गुप्ता,डॉ. सोनम दुबे,डॉ. रश्मी जैन,डॉ. पुष्पा बाथम,डॉ. मनीष सत्या,डॉ. एस. के. सूत्रकार व डॉ. अर्जुन सिंह के नाम शामिल हैं।

