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रेलवे : माता-पिता के निधन के बाद भी आश्रित बेटियों को मिलेगा मुफ्त इलाज और यात्रा पास

नई दिल्ली। रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों के परिवारों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति एक बड़ा निर्णय लागू करने का निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत, अब रेल कर्मचारी और उनकी पत्नी दोनों के निधन के बाद भी उनकी आश्रित अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियां रेलवे की स्वास्थ्य सुविधाओं और यात्रा पास का लाभ उठा सकेंगी। यह फैसला हजारों ऐसी महिलाओं के लिए वरदान साबित होगा, जो अपने दिवंगत माता-पिता की पेंशन पर निर्भर हैं और अक्सर इन सुविधाओं से वंचित हो जाती थीं।

पहले की व्यवस्था में रेल कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनकी विधवा पत्नी को विधवा पास और रिटायर्ड एम्प्लायी लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम (आरईएलएचएस) के तहत मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं मिलती थीं। लेकिन पत्नी के निधन के बाद ये सुविधाएं आश्रित बेटियों तक नहीं पहुंच पाती थीं, जिससे उन्हें अस्पतालों और रेलवे कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि सेकेंडरी फैमिली पेंशन प्राप्त करने वाली बेटियां रेलवे परिवार का अभिन्न अंग मानी जाएंगी। उन्हें रेलवे अस्पतालों में मुफ्त इलाज, दवाइयां और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इसके लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि ऐसी बेटियों का यूनिवर्सल मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड (उम्मीद) प्राथमिकता से बनाया जाए। अगर बेटी आरईएलएचएस में पहले से शामिल थीं (यानी रिटायरमेंट या कर्मचारी की मृत्यु के समय डिपेंडेंट के रूप में दर्ज), तो दोनों माता-पिता के निधन के बाद भी वे इन सुविधाओं की हकदार रहेंगी। स्वास्थ्य निदेशालय ने इसकी पुष्टि की है कि निर्भरता की शर्तें पूरी करने वाली अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियां इस योजना से बाहर नहीं होंगी। इससे न केवल इलाज का बोझ कम होगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में त्वरित मदद मिल सकेगी।

मुफ्त पास की ये होगी व्यवस्था

यात्रा सुविधाओं पर भी रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। पहले विधवा पास पत्नी के निधन के बाद बंद हो जाता था, लेकिन अब यह सुविधा बंद नहीं होगी। पास को परिवार की सबसे बड़ी पात्र बेटी के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इस पास में अन्य आश्रित सदस्यों को भी शामिल किया जा सकेगा, जो पास नियमों के अनुसार पात्र हों। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सर्कुलर भी जारी किया था जिसे अब स्पष्ट कर लागू किया जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर बेटियां बिना किसी अतिरिक्त खर्च के देशभर में यात्रा कर सकेंगी, जो उनके लिए जीवन रेखा का काम करेगा।


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