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सिर्फ कागजों पर हुआ कैंप, बिना प्रैक्टिस लखनऊ रवाना हुए खिलाड़ी


69वीं राष्ट्रीय शालेय एथलेटिक्स: नियमों की अनदेखी कर खिलाड़ियों के भविष्य से
खिलवाड़

जबलपुर। एक ओर सरकार खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय शालेय एथलेटिक्स प्रतियोगिता (आयु वर्ग 17 वर्ष) में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों के साथ खिलवाड़ का मामला सामने आया है। जबलपुर सहित प्रदेश भर से चयनित 68 एथलेटिक्स खिलाड़ियों को बिना किसी 'प्री-नेशनल कोचिंग कैंप' के सीधे नेशनल खेलने के लिए लखनऊ भेज दिया गया।

कागजों तक सीमित रहा कोचिंग कैंप

​नियमों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से पहले खिलाड़ियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर (कोचिंग कैंप) आयोजित किया जाना अनिवार्य है। इस मामले में 6 से 10 दिसंबर तक डीपीआई भोपाल द्वारा प्री-नेशनल कोचिंग कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन आरोप है कि यह कैंप केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गया। बिना किसी तकनीकी और शारीरिक तैयारी के खिलाड़ियों को सीधे 13 से 17 दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय मंच पर उतार दिया गया।

जिम्मेदार बोले- कैंप हुआ था, कोच ने साधी चुप्पी

​इस गंभीर लापरवाही पर जब जिला स्तरीय कोच अशोक कुमार राय से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। वहीं, विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि कैंप आयोजित किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। खेल जानकारों का मानना है कि बिना तैयारी के खिलाड़ियों को नेशनल भेजना न केवल उनके प्रदर्शन को प्रभावित करता है, बल्कि यह उनके भविष्य के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। ​इस घटना ने शिक्षा और खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि खिलाड़ियों के भविष्य के साथ हुई इस चूक पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

कुछ ऐसा था शेड्यूल

  • प्रतियोगिता: 69वीं राष्ट्रीय शालेय एथलेटिक्स प्रतियोगिता (लखनऊ)।
  • तारीख: 13 से 17 दिसंबर।
  • लापरवाही: 6 से 10 दिसंबर के लिए निर्धारित प्री-नेशनल कैंप का आयोजन नहीं हुआ।
  • प्रभाव: जबलपुर सहित प्रदेश के 68 खिलाड़ियों की तैयारी अधूरी रही।
  • सवाल: क्या कागजों पर खानापूर्ति कर सरकारी बजट का दुरुपयोग किया गया?

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