जबलपुर। जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। शनिवार सुबह घना कोहरा छाए रहने के कारण नेशनल हाईवे सहित प्रमुख सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) बेहद कम रही, जिससे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। सुबह 5 से 7 बजे के बीच कोहरे का असर सबसे ज्यादा देखा गया, जिसके कारण चालकों को लाइटें जलाकर रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ा।
परिवहन और सामान्य जनजीवन प्रभावित
कोहरे के साथ-साथ सूर्य देव के दर्शन न होने से कड़ाके की ठंड ने दस्तक दी है। सर्द हवाओं के चलते लोग घरों में कैद होने को मजबूर दिखे, वहीं बाजारों में भी रौनक कम रही। सबसे अधिक परेशानी कामगारों और उन लोगों को हुई जिन्हें सुबह-सुबह ग्रामीण क्षेत्रों से शहर काम के लिए आना पड़ता है। सार्वजनिक परिवहन की बसें और अन्य वाहन भी अपने निर्धारित समय से काफी देरी से पहुंचे। ठंड से बचने के लिए लोग जगह-जगह अलाव का सहारा लेते नजर आए।
किसानों पर दोहरी मार: धान और रबी फसलों पर संकट
मौसम में आए इस बदलाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वर्तमान में जबलपुर जिले के 75 से अधिक खरीदी केंद्रों पर हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ी है। बारिश की संभावना को देखते हुए किसान तिरपाल लेकर अपनी उपज को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। दूसरी ओर, रबी की फसलों (गेहूं, मटर, चना, मसूर) को अब 'मावठे' (शीतकालीन वर्षा) का इंतजार है। सिंचाई की लागत बढ़ने से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, हाल ही में बोई गई भिंडी जैसी सब्जियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में सुबह और रात के समय घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी जारी की है।
