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दमोह पैर धुलाई कांड: सुको ने बदला मप्र हाईकोर्ट का फैसला,उठाये सवाल


एफआईआर और एनएसए पर रोक के साथ रिहाई के आदेश,सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाई कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

जबलपुर। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक युवक से कथित तौर पर पैर धुलवाने और प्रताड़ित करने के मामले में मुख्य आरोपी अनुज पांडे को देश की शीर्ष अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून  के तहत की गई दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने अनुज पांडे को तत्काल जेल से रिहा करने के निर्देश देते हुए मध्य प्रदेश सरकार और हाई कोर्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

-​हाई कोर्ट के आदेश और प्रक्रिया पर उठे सवाल

​सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केवल एक वायरल वीडियो के आधार पर, बिना किसी प्रारंभिक और समुचित जांच के एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। याचिका में प्रक्रियात्मक कमियों की ओर इशारा करते हुए बताया गया कि केस डायरी और संज्ञान याचिका 15 अक्टूबर को दर्ज हुई, जबकि हाई कोर्ट ने एक दिन पहले यानी 14 अक्टूबर को ही आदेश पारित कर दिया था। इसके अलावा, बचाव पक्ष ने दलील दी कि हाई कोर्ट की वेबसाइट पर आदेश अपलोड होने से पहले ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी कर ली, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि कथित पीड़ित ने पहले एआई  तकनीक का उपयोग करके अनुज पांडे की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की थी, जिससे विवाद की शुरुआत हुई।

​-बहुचर्चित था ये मामला

गौरतलब है कि अनुज पांडे पर आरोप था कि उन्होंने ओबीसी वर्ग के एक व्यक्ति को मंदिर में बुलाकर जबरन अपने पैर धुलवाए और वह पानी पीने को मजबूर किया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद राज्य प्रशासन ने आरोपी पर रासुका  के तहत कार्रवाई की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।

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