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बदल जाएगी गांवों की कर व्यवस्था: दुकानों, गोदामों और ढाबों पर भी लगेगा टैक्स


जबलपुर के 1500 गांवों में होगा व्यावसायिक संपत्तियों का भौतिक सर्वे, जनपद पंचायतें करेंगी वसूली

जबलपुर। नगर निगम की तर्ज पर अब जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यावसायिक संपत्तियों पर टैक्स वसूली की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। जिला पंचायत ने इसके लिए कमर कस ली है और जिले की सीमा में आने वाली 542 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाली दुकानों, भवनों, निजी कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों को चिह्नित करने के लिए जल्द ही व्यापक सर्वे शुरू किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली में पारदर्शिता लाना और ग्रामीण विकास के लिए राजस्व जुटाना है। अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में चुनिंदा व्यावसायिक संपत्तियों से ही टैक्स लिया जा रहा था, लेकिन वह भी पूरी पारदर्शिता के साथ नहीं हो पा रहा था। कई जगहों पर कर वसूली में अनियमितता और शिकायतों के बाद जिला पंचायत ने पूरे सिस्टम को नए सिरे से लागू करने का निर्णय लिया है। नए साल के साथ ही इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से धरातल पर उतारने की तैयारी है।

542 पंचायतों के 1500 गांवों में होगा व्यापक सर्वे

​इस बड़े अभियान के तहत जिले की 542 ग्राम पंचायतों के लगभग 1500 से अधिक गांवों का सर्वे कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी जनपद पंचायतों को सौंपी गई है। सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि कौन सी संपत्ति पूरी तरह व्यावसायिक है और कौन सी आंशिक रूप से व्यावसायिक उपयोग में ली जा रही है। टैक्स का निर्धारण संपत्ति के क्षेत्रफल, उसके उपयोग और व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर किया जाएगा।

जबलपुर जिले की क्या है स्थिति

  • जबलपुर: 88 ग्राम पंचायत
  • सिहोरा: 60 ग्राम पंचायत
  • मझौली: 84 ग्राम पंचायत
  • पाटन: 78 ग्राम पंचायत
  • शाहपुरा: 84 ग्राम पंचायत
  • पनागर: 80 ग्राम पंचायत
  • कुंडम: 68 ग्राम पंचायत

पारदर्शिता और प्रशिक्षण पर जोर

​जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत के अनुसार, इस नई प्रक्रिया से टैक्स वसूली में पारदर्शिता आएगी और मनमानी पर अंकुश लगेगा। इसके लिए जनपद पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि टैक्स का निर्धारण तय मापदंडों के अनुसार हो और छोटे कारोबारियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। सर्वे में दुकानों के साथ-साथ गोदामों, निजी कार्यालयों, व्यावसायिक भवनों, ढाबों और अन्य सभी प्रकार के व्यवसायों का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। ग्रामीण व्यापारियों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मांग की है कि टैक्स का निर्धारण न्यायसंगत और व्यावहारिक होना चाहिए। जिला पंचायत ने आश्वासन दिया है कि टैक्स नीति पूरी तरह नियमों के तहत होगी और सभी के लिए समान रहेगी।

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