बताया गया है कि रात के सन्नाटे में गुजर रहे वाहन चालकों की नजर अचानक सड़क किनारे बैठे बाघ पर पड़ी। बाघ काफी देर तक सड़क किनारे एक पेड़ के पास शांत भाव से खड़ा रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ ने कोई घबराहट नहीं दिखाई, उसका व्यवहार बेहद सहज था। बाघ की मौजूदगी से लोग रोमांचित हुए लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कुछ देर बाद बाघ स्वयं जंगल की ओर चला गया। नागदेव टेकरी व खांडसा रोड का यह इलाका पेंच टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा है, जहां दिन-रात लोगों की आवाजाही रहती है। जंगल से सटे होने के कारण यहां अक्सर जंगली जानवर दिखाई देते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व और उससे जुड़े वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, हिरण, सांभरए, चीतल, जंगली कुत्ता, भालू, गौर (भारतीय बाइसन), नीलगाय, चौसिंघा, व जंगली सूअर जैसे कई स्तनधारी जीव पाए जाते हैं। वन अमले की ओर से लगातार गश्त की जाती है। आम नागरिकों से विशेषकर रात्रि के समय सतर्कता बरतने की अपील की जाती है। वन विभाग ने कहा है कि जंगली जानवरों को देखकर वाहन रोकना, शोर मचाना या उनके बहुत करीब जाना खतरनाक हो सकता है।
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