जबलपुर। मां नर्मदा के प्राकट्योत्सव (नर्मदा जयंती) के पावन अवसर पर इस वर्ष संस्कारधानी में स्वच्छता और श्रद्धा का एक विशेष संगम देखने को मिलेगा। पुण्य सलिला नर्मदा की निर्मलता को बनाए रखने के लिए नगर निगम प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने जानकारी दी कि उत्सव के दौरान स्थापित होने वाली मां नर्मदा की प्रतिमाओं का विसर्जन नदी की मुख्य धारा में न कर, विशेष रूप से तैयार किए गए भटौली कुंड में किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने के साथ-साथ नदी को प्रदूषण मुक्त रखना है।
निगमायुक्त ने देर रात तक लिया तैयारियों का जायजा
भक्तों की आस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक टीम पूरी तरह मुस्तैद है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बीती रात 2 बजे तक विभिन्न घाटों और भटौली कुंड का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान निगम का पूरा अमला प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और सुरक्षा घेरे को अंतिम रूप देने में जुटा रहा। महापौर और निगमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी अधिकारियों को घाटों पर तैनात रहने को कहा गया है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आयोजन की तैयारी
नगर निगम की इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा। अक्सर त्योहारों के बाद नदियों में बढ़ने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भटौली कुंड को विशेष रूप से विसर्जित प्रतिमाओं के लिए अनुकूल बनाया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मां नर्मदा का प्राकट्योत्सव पूरी भव्यता और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हो, लेकिन साथ ही जीवनदायिनी नर्मदा की स्वच्छता पर कोई आंच न आए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच इस बार का आयोजन पर्यावरण और आस्था के बीच एक बेहतर तालमेल पेश करेगा।
