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महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्तियों पर विवाद: हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस, बाहरी वकीलों को शामिल करने पर उठ रहे सवाल


स्थानीय वकीलों ने खोला मोर्चा:
एमपी हाईकोर्ट बार ने उठाए नियुक्तियों पर सवाल; दिल्ली-यूपी के वकीलों को शामिल करने का विरोध

जबलपुर। मध्य प्रदेश महाधिवक्ता कार्यालय में 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्तियों को लेकर जारी हुई नई सूची अब कानूनी विवादों में घिर गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, महाधिवक्ता कार्यालय और सभी नवनियुक्त वकीलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन की उस अर्जी को भी स्वीकार कर लिया है, जिसमें दूसरे राज्यों के वकीलों की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया गया है।

दूसरे राज्यों के वकीलों की एंट्री का विरोध

​हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन ने अपनी अर्जी में नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे दूसरे राज्यों के वकीलों को मध्य प्रदेश की सूची में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन का तर्क है कि स्थानीय अधिवक्ताओं की अनदेखी कर अन्य राज्यों के वकीलों को प्राथमिकता देना उचित नहीं है। अदालत ने इस तर्क को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में तय की है।

नियुक्ति प्रक्रिया और योग्यता के उल्लंघन का आरोप

​यह याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सह सचिव व अधिवक्ता योगेश सोनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 25 दिसंबर को विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी सूची में वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। याचिका के अनुसार, सरकारी वकील की नियुक्ति के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और अनुभव के मानक तय हैं। इसके बावजूद, सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं जिनका वकालत का अनुभव 10 साल से भी कम है, जो कि अनिवार्य नियमों के विरुद्ध है।

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