जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में वाहनों की रफ्तार को लेकर एक दिलचस्प और कड़ी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आश्चर्य जताया कि पूरे मध्य प्रदेश में ऐसी कौन सी सड़क है, जहां किसी कार को 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा सके।
क्या है पूरा मामला
यह मामला भोपाल के एक व्यवसायी मोहम्मद तारिक इरशाद से जुड़ा है, जिन्होंने साल 1998 में मारुति की जिप्सी (किंग एसटी) खरीदी थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कंपनी ने वाहन की स्पीड 180 से 200 किमी प्रति घंटा होने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में कार 100-120 किमी से ऊपर की रफ्तार नहीं पकड़ पा रही थी।
कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट का फैसला
याचिकाकर्ता ने पहले उपभोक्ता फोरम और फिर राज्य आयोग का दरवाजा खटखटाया था। राज्य आयोग ने कंपनी को खामी दूर करने या ब्याज सहित राशि वापस करने का आदेश दिया था, लेकिन राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने इस मामले को खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला उपभोक्ता कानून से संबंधित है, इसलिए याचिकाकर्ता को उपभोक्ता आयोग में ही अपना पक्ष रखना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
