जबलपुर। मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत मूक-बधिर बच्चों के उपचार में हुए भ्रष्टाचार के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बर्खास्त कर्मचारी सुभाष शुक्ला को निर्देशित किया है कि वह वसूली की 50 प्रतिशत राशि, यानी 4 लाख 48 हजार रुपये, 15 दिनों के भीतर जमा करें।
बिना उपचार फर्जी भुगतान का है मामला
यह पूरा प्रकरण जबलपुर में संविदा पर कार्यरत सुभाष शुक्ला से जुड़ा है। समाजसेवी शैलेन्द्र बारी की शिकायत पर हुई उच्च स्तरीय जांच में पाया गया कि जन्मजात दिव्यांग बच्चों का इलाज कराए बिना ही 8.96 लाख रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। परिजनों के बयान के अनुसार, बच्चों को स्पीच थेरेपी नहीं दी गई और उनके फर्जी हस्ताक्षर कर शासन की राशि हड़प ली गई। ऑडिट रिपोर्ट में भी 2.27 करोड़ रुपये के अनुपयोगी व्यय और गबन का खुलासा हुआ था।
-भ्रष्टाचार की पुष्टि पर हुई थी बर्खास्तगी
गंभीर कदाचरण और गबन की पुष्टि होने के बाद मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 20 जनवरी 2026 को सुभाष शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इस आदेश के विरुद्ध शुक्ला ने याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्ला की बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक तो लगाई है, लेकिन इसे वसूली राशि जमा करने की शर्त से जोड़ दिया है।
-निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर हटेगा स्टे
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर निर्धारित राशि जमा नहीं करता है तो बर्खास्तगी पर दिया गया स्थगन स्वतः समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने मामले के मूल शिकायतकर्ता शैलेन्द्र बारी को भी इस केस में पक्षकार बनाने का आवेदन स्वीकार कर लिया है। अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि इस घोटाले से संबंधित एक जनहित याचिका पहले से ही लंबित है। कोर्ट ने सभी तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 तय की है।
