अपडेट...जबलपुर रिंग रोड हादसा: पिलर नंबर 22 बना काल, 100 फीट नीचे गिरा लोहे का फ्रेम,दिल्ली से कल आएगा जांच दल


हादसे ने खोली सुरक्षा की पोल,
अंधेरे में बिना सुरक्षा के काम कराने का आरोप

जबलपुर। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी रिंग रोड परियोजना के निर्माण स्थल पर रविवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। न्यू भेड़ाघाट के पास ललपुर गांव में नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर के पिलर का लोहे का फ्रेम (सेंट्रिंग) अचानक ढह गया। इस दर्दनाक घटना में पश्चिम बंगाल के एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं। प्राथमिक रूप से यह आशंका जताई जा रही है कि लोहे के फ्रेम में लगा एक नट-बोल्ट ढीला होने या टूटने की वजह से संतुलन बिगड़ा और यह हादसा हुआ।

 बंगाल से आए थे श्रमिक,

​हादसे के समय करीब 100 फीट की ऊंचाई पर पिलर नंबर 22 पर काम चल रहा था। जैसे ही लोहे का ढांचा नीचे गिरा, उस पर काम कर रहे तीन मजदूर मलबे के साथ नीचे आ गिरे।  मुर्सलेम एस (उम्र 35 वर्ष), निवासी मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) की मौत हो गई। वहीं रसल एस (उम्र 22 वर्ष) और राजेश्वर सिंह (उम्र 21 वर्ष)। दोनों घायलों को तत्काल जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों के अनुसार उनके हाथ-पैरों में गंभीर फ्रैक्चर आए हैं।

संतुलन बिगड़ने से हुआ हादसा; एनकेसी कंपनी को नोटिस

​घटना के वक्त पिलर पर कॉन्क्रीट डालने का काम चल रहा था। पिलर के ऊपर संतुलन बनाए रखना अनिवार्य था, जहाँ एक तरफ एनएचएआई के इंजीनियर और दूसरी तरफ करीब 8-10 मजदूर तैनात थे। अचानक एक ओर का फ्रेम झुक गया और संतुलन बिगड़ने से वह नीचे आ गिरा। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू ने बताया कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी एनकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर, गुरुग्राम को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। मंगलवार को दिल्ली से विशेषज्ञों की एक टीम मौके पर पहुँचकर तकनीकी जांच करेगी।

अंधेरे में चल रहा था काम, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

​स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। रविवार रात जब यह काम हो रहा था, तब वहां रोशनी की कमी थी और घने अंधेरे में भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा था। ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि निर्माण कार्य में नाबालिगों से काम लिया जा रहा था। गनीमत यह रही कि रविवार होने के कारण साइट पर मजदूरों की संख्या कम थी, वरना हताहतों का आंकड़ा और बढ़ सकता था।

स्थानीय स्तर पर दर्ज किये जा रहे बयान

​हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर एसडीएम पंकज मिश्रा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। रेस्क्यू टीम ने क्रेन और भारी मशीनों की मदद से कई घंटों तक मलबे को हटाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और मजदूर नीचे तो नहीं दबा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थल पर मौजूद इंजीनियरों और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या लापरवाही पाई जाती है, तो कंपनी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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