जबलपुर. एमपी के जबलपुर-दमोह मार्ग (एनएच-34) को टू-लेन से फोरलेन किए जाने के विरोध में बोरिया बस्ती के सैकड़ों लोग शुक्रवार को सड़कों पर उतर आए। करणी सेना के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे और बस्ती को बचाने की मांग उठाई।
करणी सेना ने एनएचएआई को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में प्रभावितों के हितों की रक्षा को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
50 से अधिक घर तोडऩे पड़ेंगे
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हृ॥-34 को फोरलेन बनाने के लिए हृ॥्रढ्ढ जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कर रही है। बोरिया बस्ती के 50 से ज्यादा घर इसकी जद में आ रहे हैं। इससे 150 से अधिक नागरिकों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है।
लैंड अधिग्रहण में भेदभाव के आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। प्रभावितों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को हटाने से पहले प्रशासन को पुनर्वास और वैकल्पिक इंतजामों की ठोस योजना सामने रखनी चाहिए।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
- बोरिया बस्ती के प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था की जाए।
- जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- प्रभावितों को साथ लेकर प्रोजेक्ट ऑप्शन वर्किंग पर विचार किया जाए।
अधिकारियों का आश्वासन-पहले बात करेंगे
प्रदर्शन के दौरान एनएचएआई अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को आश्वासन दिया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई जाएगी और प्रभावितों के साथ चर्चा कर परियोजना के वैकल्पिक विकल्पों पर काम किया जाएगा।
