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SIR में विधायक विश्नोई का बड़ा खुलासा,जबलपुर में मिले हजार से अधिक संदिग्ध, कार्रवाई पर सवाल

 


12 साल से पुलिस के हाथ बंधे,विश्नोई ने डिटेंशन रोक को बताया सुरक्षा के लिए जोखिम

जबलपुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और जबलपुर से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश में संदिग्ध व्यक्तियों की बढ़ती संख्या को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान जबलपुर जिले में अब तक 1200 से अधिक संदिग्ध लोग चिह्नित किए जा चुके हैं। विश्नोई ने मांग की कि ऐसे व्यक्तियों को निरुद्ध कर उनकी गहन जांच की जाए और यदि वे विदेशी नागरिक पाए जाते हैं तो उन्हें उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई हो। सोशल मीडिया पर श्री विश्नोई ने इसकी जानकारी दी।

-डिटेंशन अधिकार बहाली की मांग, 12 वर्ष से बंद प्रक्रिया पर उठे सवाल

विधायक अजय विश्नोई ने बताया कि पूरे प्रदेश में संदिग्ध व्यक्तियों की संख्या एक लाख से अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि पिछले 12 वर्षों से मध्य प्रदेश पुलिस के पास संदिग्ध व्यक्तियों को निरुद्ध करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व में आईपीसी की धारा 109 के अंतर्गत पुलिस संदिग्धों को निरुद्ध कर सकती थी, लेकिन वर्तमान में यह प्रावधान नए कानून भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 128 में स्थानांतरित होने के बावजूद, राज्य में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा।

-2012 से लगी है रोक

विश्नोई ने दावा किया कि 2012 में तत्कालीन डीजीपी ने डिटेंशन के अधिकार पर रोक लगा दी थी, जिससे पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डिटेंशन का अधिकार पुनः लागू करने की मांग की, ताकि सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित और कानूनी कार्रवाई संभव हो सके।विधायक ने कहा कि प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी अथवा पहचानहीन व्यक्तियों की जांच आवश्यक है, क्योंकि यह कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील विषय है।

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