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सिर्फ नाम की नई शिक्षा नीति, सेशन के पांच महीने बाद हो रही लेखकों की तलाश

 


उच्च शिक्षा विभाग कर रहा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़,ताज़ा सेशन पुरानी किताबों के सहारे,टेक्स्टबुक तैयार नहीं, नोट्स और इंटरनेट का सहारा

जबलपुर। कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 शुरू हुए पाँच महीने बीत चुके हैं, लेकिन नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के आधार पर बदले गए पाठ्यक्रमों की किताबें अब तक तैयार नहीं हो सकी हैं। सरकार और प्राइवेट विश्वविद्यालयों द्वारा बनाए गए नए सिलेबस के अनुरूप टेस्टबुक का लेखन शुरू नहीं होने से हजारों कॉलेज छात्रों और शिक्षकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि विद्यार्थियों को पूरे सिलेबस की पढ़ाई नोट्स, इंटरनेट और पुराने रेफरेंस मैटेरियल के सहारे करनी पड़ रही है। शिक्षकों का कहना है कि पाठ्यक्रम में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए, ऐसे में बिना मानक टेक्स्टबुक के पढ़ाई न तो व्यवस्थित हो सकती है और न ही परीक्षाओं की तैयारी सुचारू रूप से हो सकती है। उच्च शिक्षा विभाग ने अब विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और कॉलेजों के प्राचार्यों से यह जानकारी माँगी है कि किन-किन विषयों में पुस्तक लेखन के लेखक उपलब्ध हैं और किन विषयों में लेखकों की खोज शुरू की जानी है। विभाग का यह कदम स्पष्ट करता है कि नई किताबें अगले सत्र तक ही उपलब्ध हो पाएंगी। ये सूची 26 दिसम्बर तक विभाग को भेजनी है। 

-अगले सत्र में मिल पाएंगी किताबें?

नई एनईपी नीति के अनुसार पूरे प्रदेश में यूजी-पीजी के सिलेबस बदले गए हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक कला, योग, नैतिक शिक्षा और कई आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। लेकिन सिलेबस बदलने के बावजूद पुस्तक लेखन का काम समय पर शुरू नहीं किया गया, जिसकी वजह से कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। विभाग ने विश्वविद्यालयों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक योग्यता वाले लेखक उपलब्ध कराने के निर्देश भेजे हैं। यदि कोई विषय ऐसा है जिसमें विशेषज्ञ लेखक नहीं हैं, तो उस विषय के लिए नए लेखकों की तलाश की जाएगी।पुस्तक लेखन की प्रक्रिया स्वयं में लंबी है,लेखन, समीक्षा, संपादन, प्रूफरीडिंग और प्रकाशन जैसे चरणों को पूरा करने में महीनों का समय लगता है। ऐसे में विभाग की देरी से यह लगभग तय है कि छात्रों को इस पूरे शैक्षणिक सत्र में मानक टेक्स्टबुक उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किताबों के बिना पाठ्यक्रम लागू करना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य गुणवत्ता बढ़ाना था, लेकिन धीमी गति से चल रही प्रक्रियाएँ उल्टा शिक्षण व्यवस्था को अव्यवस्थित कर रही हैं।

-कैसे लेखक चाहिए

उच्च शिक्षा विभाग ने जिन लेखकों की तलाश शुरू की है, उनके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए गए हैं। लेखक वही चुने जाएँगे जिनके पास संबंधित विषय में विशेषज्ञता, शोध अनुभव और विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षण का ज्ञान हो। विभाग ने यूजीसी नियमों के अनुसार योग्यताएँ निर्धारित की हैं, जिनमें विषय में पीएचडी या एमफिल, अथवा सहायक,सह-प्राध्यापक के रूप में पर्याप्त अनुभव को अनिवार्य माना गया है। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की समझ भी आवश्यक बताई गई है, ताकि पाठ्यपुस्तक आधुनिक शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप तैयार की जा सके। इसके अलावा, लेखक में समयबद्ध कार्य क्षमता और पुस्तक लेखन या संपादन का पूर्व अनुभव होना भी वांछनीय है।

-निर्देशों को पालन किया जाएगा

महाकोशल कॉलेज के प्राचार्य अल्केश चतुर्वेदी ने कहा कि पत्र आने के साथ ही।लेखकों की खोज शुरू कर दी गयी है। समय पर सूची प्रेषित की जाएगी। वहीं रादुविवि के कुलसचिव आरएस बघेल के अनुसार, विभाग के निर्देशों का समय-सीमा में पालन किया जाएगा।

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