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विंटर डायरिया की दस्तक, बच्चे सॉफ्ट टारगेट

 


बढ़ी ठंड के साथ मरीजों की संख्या 15–20% तक बढ़ी, डॉक्टर बोले, मर्जी से न दें दवाएं

जबलपुर। मौसम में ठंडक बढ़ते ही मौसमी बीमारियाँ सक्रिय होने लगी हैं, जिनमें विंटर डायरिया के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले एक सप्ताह में जिलों के विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या 15–20 प्रतिशत तक बढ़ी है। चिकित्सकों का कहना है कि शिशु और छोटे बच्चे इस बीमारी के सॉफ्ट टारगेट हैं, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और वे तापमान के बदलाव से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। विंटर डायरिया में बच्चों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएँ तेजी से होती हैं। कई मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार सफ़ाई की कमी, दूषित पानी, बासी भोजन और वायरस संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि विंटर डायरिया के पीड़ित बच्चों को दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और अस्पतालों में आवश्यक व्यवस्था की गई है। हालांकि कई माता-पिता समय पर चिकित्सक के पास नहीं पहुँच पाते, जिससे बच्चे की हालत और बिगड़ जाती है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सा परामर्श लेना जरूरी है।

  इन लक्षणों से समझें डायरिया

चिकित्सकों ने बताया कि विंटर डायरिया के आम लक्षणों में बार-बार ढीला दस्त होना, उल्टी, तेज बुखार, अत्यधिक थकावट, सुस्ती, भोजन से अरुचि और तेज निर्जलीकरण शामिल हैं। जिन बच्चों में पेशाब कम होना या होंठ सूखने जैसे संकेत मिलते हैं, उनमें डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक रहता है और ऐसे में तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

मुख्य कारण

  • हाथों की सफाई न रखना
  • दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन
  • वायरस संक्रमण, विशेषकर रोटावायरस
  • खराब मौसम में खराब भोजन का सेवन
  • बच्चों की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

बचाव के उपाय
विशेषज्ञों ने कहा है कि साफ-सफाई बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों को सादा, ताजा और हल्का भोजन दें। बाहर का तला-भुना या ठंडा भोजन न खिलाएँ। पानी उबालकर ही दें और बोतलें–चम्मच अच्छी तरह धोएँ। हाथ धोने की आदत पर विशेष जोर दिया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण का 60 प्रतिशत खतरा हाथों की सफाई से कम किया जा सकता है।
गंभीर लक्षणों की स्थिति में घर पर इलाज करने के बजाय तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। ओआरएस, जिंक और जरूरत पड़ने पर दवा डॉक्टर की सलाह से ही दें।

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