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विधायक संजय पाठक के विरुद्ध अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कसा शिकंजा




छह जिलों से मांगी गई रिपोर्ट,जबलपुर भी शामिल,आदिवासी जमीनों का रिकॉर्ड भेजना होगा

जबलपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़े कथित भूमि खरीद मामलों की जांच शुरू कर दी है। आयोग ने जबलपुर, उमरिया, डिंडोरी, सिवनी और कटनी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे आदिवासी के नाम पर खरीदी गई जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज, प्रक्रियाएँ और जांच रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराएँ। आयोग द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शिकायतों में आदिवासी भूमि संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप है। ऐसे मामलों में यह देखा जाएगा कि भूमि खरीद की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं, और क्या किसी दबाव, धोखाधड़ी या कानूनी खामियों का उपयोग किया गया।कलेक्टरों से कहा गया है कि वे संबंधित तहसीलों व राजस्व विभाग से रिपोर्ट लेकर निर्धारित समयसीमा में आयोग को भेजें, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

जांच पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

आयोग की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्ष पहले से ही इन मामलों को लेकर सरकार और विधायक पर हमलावर था। अब केंद्रीय संवैधानिक निकाय की जांच से मामला और गंभीर हो गया है। सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में आदिवासी भूमि की खरीद–फरोख्त को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्तियों ने आदिवासी भूमि कानूनी प्रतिबंधों को दरकिनार कर खरीदी, जिससे मूल निवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हुए।कलेक्टरों द्वारा भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की सुनवाई और आवश्यक कार्रवाई करेगा। यदि जांच में अनियमितताएँ सामने आती हैं, तो प्रकरण आगे बढ़ाया जाएगा।

जांच से जुड़े मुख्य बिंदु

• राष्ट्रीय जनजाति आयोग ने छह जिलों को भेजा पत्र  

• आदिवासी के नाम पर खरीदी गई जमीन की जांच  

• कलेक्टरों से संपूर्ण रिपोर्ट व दस्तावेज मांगे  

• राजनीतिक स्तर पर मामला फिर हुआ गर्म

जबलपुर कलेक्टर क्या बोले

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें आयोग के पत्र की जानकारी नहीं है। 

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