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वेटरनरी यूनिवर्सिटी के टेंडर में लगी फर्जी बैंक गारंटी!


50 हजार की एफडीआर संदिग्ध, महू वेटरनरी टेंडर की पड़ताल शुरू

जबलपुर। नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में जमा की गई 50 हजार रुपये की एफडीआर पर संदेह गहराने के बाद प्रशासन ने इसकी गहन जांच शुरू कर दी है। यह एफडीआर महू वेटरनरी कॉलेज के सेप्टिक टैंक के टेंडर के लिए ठेकेदार द्वारा जमा कराई गई थी।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि एफडीआर से जुड़े कुछ विवरण,जैसे जारी तिथि, नंबर और शाखा,रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। इसी कारण प्रशासन ने बैंक से मूल दस्तावेज और सत्यापन रिपोर्ट मांगी है।अकाउंट ऑफिसर ने एफडीआर की कॉपी देखकर कहा कि दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह है और बैंक से तलब की गई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। ठेकेदार से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है, मगर अब तक उसका कोई जवाब नहीं मिला। बैंक अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की, जिससे प्रक्रिया और संदिग्ध लगने लगी है। यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट रजिस्ट्रार  डॉ. रामकिंकर मिश्रा के अनुसार, एफडीआर की शिकायत की जांच शुरू की गई है। 

 बैंक का रिकॉर्ड नहीं मिला, पुलिस कार्रवाई संभव

एफडीआर की वैधता पर संदेह बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी टेंडर फाइल खोलकर जांच शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बैंक की ओर से दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तो यह मान लिया जाएगा कि एफडीआर फर्जी या गलत विवरण पर आधारित है, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। जांच अधिकारी अब पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिसे उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की सच्चाई सामने आने पर रिपोर्ट पुलिस को भेजी जाएगी ताकि कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।अधिकारियों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया में बैंक गारंटी या एफडीआर जैसे दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर सख्त कदम उठाया जाएगा। 

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