मोरारी बापू का संदेश: गीता–रामायण को सांप्रदायिक बताना अज्ञान, लालच देकर करवाया जा रहा धर्मांतरण
जबलपुर। जबलपुर में आयोजित कथा के दौरान कथावाचक पूज्य मोरारी बापू ने आज मीडिया के समक्ष धर्म, अध्यात्म और सामाजिक संकटों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि गीता और रामायण “वैश्विक ग्रंथ” हैं, इन्हें सांप्रदायिक बताना सबसे बड़ा भ्रम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये ग्रंथ मानवता को जोड़ने वाले हैं, विभाजन करने वाले नहीं। उन्होंने कहा कि समय के बदलाव के साथ अब हमें नई दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।
लालच का धर्म, टिकता नहीं
बापू ने धर्मांतरण को लेकर बयान देते हुए कहा कि लालच, पैसे या सुविधा के बदले कराया गया धर्म परिवर्तन पूर्णतः अस्थायी है। उन्होंने कहा कि यह केवल धर्म का अपमान नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन पर हमला है। बापू ने स्पष्ट कहा कि धर्म वही बदलता है, जहाँ मन बदलता है, जहाँ जेब बदलती है, वहाँ धर्म नहीं बदलता।उन्होंने इसे “संस्कृति पर आघात” बताते हुए समाज और शासन दोनों से ऐसी प्रवृत्तियों पर सख्त रोक लगाने की अपील की।
दुनिया ग्रंथों में ढूंढ रही समाधान
बापू ने कहा कि आज दुनिया तनाव, संघर्ष और अव्यवस्था से जूझ रही है, और समाधान भारतीय ग्रंथों में तलाश रही है। रामायण और गीता का सार पूरी दुनिया को मार्ग दिखा रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन ग्रंथों को केवल धार्मिक ग्रंथ न मानकर जीवन-दर्शन के रूप में अपनाएँ।
