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अंतिम विदा के साथ दे गए 'दृष्टि का उपहार': अरुण कुमार जैन की अनुकरणीय पहल


मानवता की अनूठी मिसाल: 93 वर्ष की आयु में नेत्रदान कर रोशन किया दूसरों का संसार

​जबलपुर। जबलपुर के शक्तिनगर निवासी और सन्मति ज्ञानोदय समिति के वरिष्ठ सदस्य अरुण कुमार जैन ने जाते-जाते दुनिया को एक बहुमूल्य संदेश दे दिया। शनिवार, 20 दिसंबर को 93 वर्ष की गरिमामयी आयु पूर्ण करने के पश्चात उनका स्वर्गवास हो गया। शोक की इस घड़ी में भी उनके परिजनों ने जो साहस और संवेदनशीलता दिखाई, वह समाज के लिए अनुकरणीय है। दुख और पीड़ा के क्षणों में भी परिवार ने 'परोपकार' को सर्वोपरि रखते हुए श्री जैन के नेत्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह निर्णय केवल एक भावुक कदम नहीं था, बल्कि दो नेत्रहीनों के जीवन में फिर से रंगों को भरने का एक जरिया बना। श्री जैन के सुपुत्र, मनीष सेठ (सहायक संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग, जबलपुर) और समस्त शोक संतप्त परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा और सेवा के संकल्प को पूरा करते हुए यह पुनीत कार्य संपन्न कराया।

नेत्र ज्योति मिशन और चिकित्सा दल का कुशल समन्वय

​नेत्रदान की यह जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया दादा वीरेंद्र पुरी देव जी नेत्रालय की टीम द्वारा अत्यंत कुशलता के साथ पूरी की गई। डॉ. पवन स्थापक के मार्गदर्शन में चिकित्सा दल ने श्री जैन के निवास स्थान पर पहुँचकर नेत्र प्राप्ति की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस पूरे कार्य में नेत्र ज्योति मिशन, बरेला ने सेतु का कार्य किया, जो लंबे समय से अंधत्व निवारण की दिशा में सक्रिय है। मिशन की ओर से स्व. अरुण कुमार जैन के परिजनों को इस महान त्याग के लिए 'साधुवाद' दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक आयु में भी नेत्रों का दान संभव है और यह उन लोगों के लिए एक सीख है जो उम्र या बीमारियों के डर से नेत्रदान करने में झिझकते हैं। जबलपुर का यह उदाहरण समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। श्री जैन अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आँखों के जरिए कोई और इस खूबसूरत संसार को देख पाएगा।

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