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पुलिस जांच में बदला केस: फरियादियों पर संदेह, आरोपी निकले पीड़ित

 


जांच में सामने आया उलटा सच,परिस्थितियाँ बताती हैं झगड़े की असल वजह, पुलिस कर रही तथ्य जुटाने की कार्रवाई

जबलपुर। थाना माढोताल क्षेत्र में कटंगी बाईपास सूरतलाई रोड पर हुए मारपीट प्रकरण में पुलिस जांच ने प्रारंभिक रिपोर्ट को पूरी तरह उलटकर रख दिया है। 3 दिसंबर की रात घटित इस घटना में पहले जिन लोगों को आरोपी बताया गया था, पुलिस की जांच में वही अब पीड़ित के रूप में सामने आने लगे हैं। घटना उस समय हुई जब शैलेन्द्र पटेल (35), निवासी आईटीआई शिवधाम नगर एवं हेल्थ सिटी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड इंचार्ज, अपने मित्र प्रथम सिंह राजपूत, नीतेश चौबे, आकाश चढार, अभिषेक पटेल के साथ खाना खाने सूरतलाई जा रहा था। शैलेन्द्र ने रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि सुनीता वेयरहाउस के सामने सफेद स्विफ्ट कार में बैठे मोनू जैन, नीरज जैन, निक्की जैन ने पुरानी रंजिश को लेकर उनकी कार को टक्कर मारकर रोक दिया और फिर बका, रॉड, चेन और पाइप से जानलेवा हमला किया। शैलेन्द्र के अनुसार, मोनू जैन ने उस पर सिर पर बका से वार किया, नीरज जैन ने सिर में चोट पहुँचाई और निक्की जैन ने पैर व कमर पर पाइप से हमला किया। बीच बचाव करने वाले नीतेश चौबे पर भी जानलेवा हमला होने का दावा किया गया था। मामला बढ़ने पर एक अन्य ग्रे रंग की स्विफ्ट कार से गोविंदा और एक अन्य युवक आने की बात भी कही गई।पीड़ित बताए गए सभी घायलों को हेल्थ सिटी हॉस्पिटल लाया गया, जहाँ से गंभीर रूप से घायल नीतेश चौबे को आगे उपचार के लिए मैट्रो अस्पताल भेजा गया। कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई। पुलिस ने प्रारंभिक रिपोर्ट पर धारा 296, 118(1), 109(1), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया था।

जांच में नए तथ्य,पहले शिकायतकर्ता अब संदिग्ध, “आरोपी” पक्ष हुआ मजबूत

पुलिस की गहन जांच में घटनास्थल के साक्ष्य, गवाहों के बयान, आसपास के सीसीटीवी फुटेज और चिकित्सकीय रिपोर्टों के आधार पर यह सामने आने लगा है कि मामला एकतरफा नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच पहले की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक शिकायत में कई तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था, जबकि मोनू जैन, नीरज जैन, निक्की जैन और गोविंदा पक्ष के बयान विरोधाभासों को उजागर कर रहे हैं। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि मारपीट की शुरुआत किसने की, टक्कर हादसा था या जानबूझकर किया गया, और हथियारों के उपयोग का दावा कितना सही है,इन सभी पहलुओं पर पुलिस पुनः विवेचना कर रही है। सूत्रों का कहना है कि फरियादी पक्ष की कहानी कई स्थानों पर संदिग्ध पाई गई है, जिसके चलते अब आरोपियों के बताए गए व्यक्तियों को पीड़ित मानकर भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस जल्द ही समग्र तथ्यों के आधार पर संशोधित कार्रवाई की तैयारी में है।

घटना स्थल बयान कर रहा हकीकत

घटनास्थल पर मिले साक्ष्य प्रारंभिक शिकायत से अलग कहानी बयां कर रहे हैं। कारों की टक्कर की दिशा, टूटे शीशे, हथियारों के निशान और खून के धब्बों की स्थिति से स्पष्ट है कि झगड़ा अचानक भड़का नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की ओर से तीव्र संघर्ष हुआ। मौके पर मिले भौतिक प्रमाण बताते हैं कि मारपीट एकतरफा नहीं थी, जिससे पुलिस की जांच नए मोड़ पर पहुँच गई है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि हैल्थ सिटी हॉस्पिटल की टीम सूरतलाई गयी क्यों थी, इससे सन्देह खड़े हो रहे हैं।

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