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' जीभर के जी जिंदगी ', अब उन्हीं आंखों से रंगीन होगी किसी की जिंदगी, देखें वीडियो


शतायु मीराबाई अग्रवाल ने किया नेत्रदान

जबलपुर। राइट टाउन में रहने वाली शतायु के पड़ाव पर मीराबाई अग्रवाल को उनके परिजनों सहित लोग नमन कर रहे हैं, जिन्होंने जीवन की अंतिम नियति तक पहुंचने के बाद अपनी आंखों का नेत्रदान करने की ठान ली थी। परिजनों ने भी उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया और मंगलवार को उनकी मृत्योपरांत आंखें दान की। परिजनों का कहना है कि पुरानी विचारधारा की उनकी वयोवृद्ध पालक का यह कदम समाज के उन लोगों को लिए प्रेरणादायक होगा, जो इस उम्रदराज पर पहुंच गए हैं।

अग्रवाल सभा और अग्रवाल विकास मण्डल, गढ़ाफाटक के संस्थापक सेठ रामनाथ की धर्मपत्नी और सुरेश, महेश, अशोक, नरेंद्र, दिनेश, धर्मेश अग्रवाल एवं आशा दुबे की माता मीराबाई अग्रवाल का 98 वर्ष की आयु में मंगलवार को देहान्त हो गया। वयोवृद्घ होने की वजह से परिजनों के बीच असमंजस्य था कि उनकी अंतिम इच्छा नेत्रदान को कैसे पूरा करेंगे? हुआ फिर कि दादा वीरेंद्रपुरी आई हॉस्पिटल से संपर्क किया और नेत्रदान के लिए परिजन तैयार हो गए। मौके पर आई स्पेशलिस्ट सहित स्टाफ मौके पर पहुंचा। मृत्यु उपरांत उनकी आंखों का ट्र्ांसप्लांट के लिए विच्देदन किया।



नेत्रदान के बारे में परिवार के राजेश अग्रवाल कहते हैं कि सादगी से जीवन जीने वाली उनकी दादी की अंतिम इच्छा हम पूरी कर रहे हैं। दादी का हमेशा कहना था कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी आंखों से कोई नेत्रहीन इस दुनिया को देख सकेगा और अपना जीवन संवार सकेगा। 

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