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साहित्य और संगीत के संगम से जीवंत हुईं डॉ.विजय शुक्ल की स्मृतियाँ,देखें वीडियो



जबलपुर।
लोक सुधा : संगीत गुरूकुल संस्थान द्वारा जबलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. विजय शुक्ल की स्मृति में एक गरिमामय 'स्मृति समारोह' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध समीक्षक डॉ. स्मृति शुक्ल के उद्बोधन से हुई, जिन्होंने डॉ. विजय शुक्ल को हिन्दी आलोचना साहित्य की मौलिक मान्यताओं का प्रणेता और शोधार्थियों के लिए आदर्श बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि डॉ. शुक्ल प्रयाग के विख्यात साहित्यकार पं. गिरिजादत्त शुक्ल 'गिरीश' के सुपुत्र थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. धीरेन्द्र पाठक ने डॉ. विजय शुक्ल को एक आदर्श प्राध्यापक के रूप में याद किया। सारस्वत अतिथि डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं, वहीं पं. रुद्रदत्त दुबे ने मंगलभाव व्यक्त करते हुए उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. बैजनाथ गौतम ने मंच संचालन व आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन भारती शुक्ला द्वारा किया गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुति और स्वरांजलि


समारोह के द्वितीय चरण में 'गुरूकुल संगीत स्वरांजलि' के अंतर्गत संगीत साधकों ने अपनी कला से श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसमें पं. रुद्रदत्त दुबे, डॉ. बैजनाथ गौतम, डॉ. प्रकाश तिवारी, डॉ. शिप्रा सुल्लेरे, सौम्या मिश्रा, अर्चना गोस्वामी, शिवानी राजपूत और दिव्यानी तिवारी ने सुमधुर प्रस्तुतियाँ दीं। संगतकार के रूप में अंजु दुबे और धरमू मिलोदिया ने साथ दिया। 

​-इनकी रही विशेष उपस्थिति

इस अवसर पर शहर के अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, जिनमें शरदचंद्र पालन, अभिमन्यु जैन, राज सागरी, डॉ. कौशल दुबे, डॉ. मानंद सिंह राणा, डॉ. अनामिका तिवारी, नवीन चतुर्वेदी, डॉ. पूनम शर्मा, डॉ. अल्केश चतुर्वेदी, डॉ. बलराम अहिरवार, गुप्तेश्वर द्वारका गुप्त, डॉ. कृष्णा पटेरिया और अजय मिश्रा प्रमुख थे। कार्यक्रम का संचालन माधुरी उमेश मिश्रा ने किया। 

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