मौलाना रजवी ने कहा कि एक मुस्लिम महिला का मंदिर जाना और धार्मिक अनुष्ठान करना शरीयत और इस्लाम के खिलाफ है। मुस्लिम होने के नाते, महाकाल मंदिर में जल अर्पित कर और धार्मिक परंपराओं का पालन कर नुसरत इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही हैं, उन्हें पश्चाताप करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर मौलाना के नुसरत को इस्लाम धर्म का पाठ पढ़ाने से उज्जैन के कई संत नाराज हो गए हैं। उन्होंने नुसरत के महाकाल मंदिर के दर्शन करने को गंगा जमुना तहजीब और घर वापसी बताकर मौलाना को ऐसे मामले से दूर रहने की सलाह दी है।
मौलाना की प्रतिक्रिया पर संतों का गुस्सा फूटा-
महंत विशाल दास ने कहा कि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से घर वापसी कर रहा है तो मौलवी के पेट क्यों दुख रहा है। लड़कियां जलालत भरी जिंदगी से बाहर निकल रही है और महाकाल के दर्शन कर वहां शीश झुका रही हैं तो आपको गर्व होना चाहिए। ऐसे मौलवी को हिदायत किसी को धर्म सौंपने की कोशिश न करें, नहीं तो महाकाल बैठे हैं अपने त्रिशूल को लेकर, मौलाना अपनी बयानबाजी बंद करें। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत सत्यानंद ने कहा कि भारतीय फिल्म अभिनेत्री का महाकाल आना शहाबुद्दीन को अच्छा नहीं लगा। आप गंगा जमुना तहजीब की बात करते हैं, सनातन में आस्था रख रही हैं। इस तरह फतवा जारी नहीं करना चाहिए।
नुसरत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी-
दाऊदी बोहरा समाज से आने वाली नुसरत ने अब तक इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि नुसरत ने महाकाल मंदिर दर्शन के दौरान बताया था कि वे दूसरी बार आई हैं और आगे भी आएंगी। नुसरत ने खुद अपनी यात्रा को शांतिपूर्ण और सकारात्मक अनुभव बताया है। मंदिर की व्यवस्था की तारीफ भी की।