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तीन पत्रकारों को अदालत से राहत, सरकार से सवाल

 


हाईकोर्ट:पुलिस अधिकारियों पर स्टिंग करने वाले तीन रिपोर्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, चार सप्ताह में जवाब तलब

जबलपुर।  सागर जिले में अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले पुलिस अधिकारियों पर स्टिंग ऑपरेशन करने वाले तीन पत्रकारों को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। पत्रकारों ने आशंका जताई थी कि उनके द्वारा किए गए खुलासों के बाद पुलिस प्रशासन उन पर झूठे प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार करने की तैयारी कर रहा है। इसी आधार पर दायर रिट याचिका WP/47545/2025 पर शुक्रवार को जस्टिस हिमांशु जोशी की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किए। अदालत ने मध्य प्रदेश शासन से पूछा है कि 30 नवंबर 2025 को प्रकाशित समाचारों में जिन पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उनके विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई है। साथ ही, मुख्य सचिव, गृह सचिव, विधि सचिव, डीजीपी और सीबीआई को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

स्टिंग में उजागर हुए अवैध कार्य, पुलिस ने शुरू की पत्रकारों की निगरानी

स्टिंग ऑपरेशन में सागर के चार थानों,बहेरिया, मोतीनगर, मकरोनिया और गोपालगंज,के थाना प्रभारियों पर आरोप लगाया गया था कि वे अवैध शराब, जुआ–सट्टा, नाबालिगों के माध्यम से ड्रग्स बिक्री और स्पा सेंटरों में देह व्यापार जैसी गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं। कथित रूप से, यह संरक्षण 6,000 रुपये साप्ताहिक और 20,000 रुपये मासिक के एवज़ में दिया जा रहा था। खबरें प्रकाशित होने के बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस प्रशासन ने याचिकाकर्ताओं की कॉल रिकॉर्डिंग और निजी निगरानी शुरू कर दी। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। इस आशंका के चलते तीनों ने  हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

 अदालत ने प्रदान की  सुरक्षा

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने दलील दी कि पत्रकारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई न करके उलटे पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्रकारों ने स्टिंग के ऑडियो–वीडियो फुटेज पेन ड्राइव में कोर्ट को सौंपे, जिनकी सत्यता जांची जा सकती है। अदालत ने तर्कों को गंभीर मानते हुए “नो कोर्सिव एक्शन” का अंतरिम आदेश दिया है। यानी याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई करने पर रोक रहेगी। याचिका में सागर रेंज की आईजी हिमानी खन्ना, एसपी विकास सहवाल, और संबंधित चारों थानों के प्रभारी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।


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