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संजय पाठक से जुड़ी कंपनियों पर 443 करोड़ की वसूली का नोटिस

 


विधानसभा में खुलासा,जबलपुर में बड़े पैमाने पर ओवर माइनिंग, 15 दिन में राशि जमा करने के निर्देश

जबलपुर। विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़ी कंपनियों पर लगाए गए भारी-भरकम 443 करोड़ रुपये के वसूली नोटिस के मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और खनिज विभाग ने स्पष्ट किया कि जबलपुर जिले की चार कंपनियों ने स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक रेत का उत्खनन किया। यह ओवर माइनिंग “स्पष्ट अवैध उत्खनन और राजस्व हानि” की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर यह वसूली निर्धारित की गई है।
जबलपुर कलेक्टर द्वारा 10 नवंबर 2025 को जारी आदेशों में सभी संबंधित कंपनियों को 15 दिन की समय-सीमा में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न होने पर भू-राजस्व संहिता एवं खनिज नियमों के तहत बड़े स्तर की कार्रवाई तय है।

चार कंपनियों पर 4,43,04,86,890 रुपये का आर्थिक दंड

खनिज विभाग ने बताया कि कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई है। रिपोर्ट में पाया गया कि इन चार कंपनियों—

  • आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, ग्राम टिकरिया
  • नीलिमा मिनरल्स, ग्राम दुबियारा
  • नीलिमा मिनरल्स, ग्राम अगरिया
  • पैसिफिक एक्सपोर्ट, ग्राम झिठी

  • इन कम्पनियों द्वारा स्वीकृत ठेके क्षेत्र में रेत का उत्खनन निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक किया।
  • टीपी (ट्रांसपोर्ट परमिट) मिलान के दौरान भारी अंतर उजागर हुआ और कई जगहों पर नज़दीकी घाटों से चोरी-छिपे रेत निकालकर अन्य जिलों में भेजने के संकेत भी मिले।
    कलेक्टर ने आदेशों में लिखा है कि यह मामला नियम 194/2014 तथा कोर्ट आदेश 02/08/2017 के अनुसार “ओवर माइनिंग” की श्रेणी में आता है, जिसके लिए आर्थिक दंड देय है।

  • विभाग का स्पष्ट रुख,नियम 216 और भू-राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई तय

खनिज विभाग ने विधानसभा सचिवालय को दिए लिखित उत्तर में कहा कि कंपनियों को वसूली आदेश जारी किए जा चुके हैं। यदि 15 दिन में राशि जमा नहीं की गई तो बैंक खातों की कुर्की, मशीनरी जब्ती और पट्टा निरस्तीकरण की कार्रवाई लागू होगी। इसके अलावा व्यापक पुनः जांच भी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियां रोकी जा सकें।
विभाग ने यह भी कहा कि जिले में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए कई स्तरों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और आवश्यकतानुसार व्यापक ऑडिट भी किया जा सकता है।

 कांग्रेस का बड़ा आरोप,यह 1000 करोड़ का खेल

प्रश्न पूछने वाले कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि वास्तविक राजस्व हानि 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। उनका आरोप है कि रेत ठेकेदारों को वर्षों तक संरक्षण मिलता रहा, जिसके कारण इस स्तर का अवैध उत्खनन संभव हुआ। उन्होंने पूरे जिले एवं अन्य जिलों में भी विस्तृत ऑडिट की मांग की। उधर मामले में घिरी कंपनियों से जुड़े विधायक संजय पाठक ने बयान दिया कि अफसरों ने अनुमान से रिपोर्ट बनाई, जिस पर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।अब पूरे प्रदेश की नज़र इस बात पर है कि 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद वसूली प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या जांच में नए नाम भी सामने आते हैं।

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