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बालाघाट के अंतिम नक्सली दीपक-रोहित ने किया सरेंडर, दोनों पर था 29 लाख का इनाम था

 

बालाघाट। एमपी के बालाघाट में अंतिम हार्डकोर नक्सली दीपक ने आज  बिरसा क्षेत्र के कोरका में अपने साथी रोहित के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही बालाघाट जिला आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त हो गया है। नक्सल एएसपी आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि दीपक पर 29 लाख रुपए और रोहित पर 14 लाख रुपए का इनाम घोषित था। दोनों ने कोरका कैंप पहुंचकर हथियार त्याग दिए और पुनर्वास की इच्छा जताई।

                             बालाघाट जिला 1990 के दशक से नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश को मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करने की समय सीमा तय की थीए लेकिन बालाघाट ने इस लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है। दीपक और रोहित ने राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के तहत आत्मसमर्पण किया है। उन्हें मौजूदा नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और सामाजिक पुर्न स्थापना का आश्वासन दिया गया है। जिले में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया 1 नवंबर को महिला नक्सली सुनीता के समर्पण से शुरू हुई थी। इसके बाद 6 दिसंबर की देर रात करीब 10 अन्य नक्सलियों ने भी बालाघाट में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इससे पहलेए जिले की नक्सली संगीता ने गोंदिया में और संपत ने छत्तीसगढ़ में हथियार त्यागकर मुख्यधारा में वापसी की थी।


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