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रेलवे ने कागज़ों में बनाया ग्रीन कॉरिडोर, ज़मीन पर कुछ नहीं

 


जबलपुर से नागपुर तक पर्यावरणीय वादे ढेर,ब्रॉडगेज की अपग्रेड लाइन में बड़ी चूक:निर्देशों का खुला उल्लंघन

 जबलपुर। जबलपुर–नागपुर रेल खंड के ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। लंबे समय से चल रहे इस महत्वपूर्ण रेल अपग्रेड में न तो ग्रीन कॉरिडोर विकसित हुआ और न ही निर्धारित पौधारोपण किया गया। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यात्रियों को तो फायदा मिला, लेकिन पर्यावरणीय मानकों और वायु गुणवत्ता सुधार के निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि परियोजना के पहले चरण में जबलपुर से केवल 46 किमी तक ही काम होना था, जिसमें स्टेशन परिसर, गनेरी, गोसलपुर, देवरी आदि क्षेत्र शामिल थे। लेकिन इन क्षेत्रों में न ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया गया, न पौधारोपण। रेलवे की ओर से इन पर कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं दिया गया।

-ग्रीन कॉरिडोर प्लान अधूरा

नागपुर रूट पर जब पुश-पुल ट्रेन चलाई गई थी, तभी ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने और पर्यावरण-संरक्षण वाली परियोजनाएँ लागू करने का निर्देश दिया गया था। रेल खंड पर बनने वाला यह कॉरिडोर यात्रियों को कम प्रदूषण, अधिक हरियाली और स्वच्छ रेल यात्रा देने का लक्ष्य रखता था। लेकिन योजना फाइलों से आगे बढ़ ही नहीं सकी।

-वायु गुणवत्ता सुधार भी अधर में

पटरियों के दोनों ओर धूल नियंत्रण, हरियाली बढ़ाने, वायु गुणवत्ता सेंसर लगाने और रेल क्षेत्र में पारिस्थितिकी सुधार के उपाय भी नहीं किए गए। रिपोर्ट कहती है कि डस्ट कंट्रोल यूनिट, वॉटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम, और हरियाली बेल्ट विकसित करने जैसे उपायों को अनदेखा कर दिया गया।

-क्या-क्या काम नहीं हुए

ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण अधूरा

वायु गुणवत्ता सुधार पर कोई प्रगति नहीं

निर्धारित पौधारोपण शून्य

डस्ट कंट्रोल व स्प्रिंकलिंग सिस्टम नहीं लगाए

रूट पर पर्यावरणीय मॉनिटरिंग पूरी तरह गायब

-पहले चरण की क्या थी योजना

जबलपुर––देवरी तक 46 किमी क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर

रेलवे स्टेशनों पर हरियाली बढ़ाना

पौधारोपण के साथ धूल नियंत्रण उपाय

रेल रूट को प्रदूषण-नियंत्रित कॉरिडोर में बदलना

यात्रियों को शानदार और साफ सफर का अनुभव दिलाना


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