जबलपुर। उच्च शिक्षा विभाग ने जबलपुर के निजी विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। विभाग द्वारा आयोग को भेजे गए पत्र में न केवल शिकायतों की सूची मांगी गई है, बल्कि अब तक किए गए निराकरण और लंबित प्रकरणों की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा गया है। विभाग का कहना है कि निजी विवि में कार्यरत शिक्षकों की समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं और कई विश्वविद्यालय इन शिकायतों को नियमानुसार संबोधित नहीं कर रहे।
शिक्षक सेवाओं, वेतन और सुविधाओं पर उठे सवाल
विभागीय सूत्रों के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में सबसे अधिक शिकायतें वेतन संबंधी विसंगतियों, सेवा-शर्तों का पालन न होने, कार्यप्रणाली में अनियमितताओं, शोध एवं अन्य शैक्षणिक कार्यों में बाधा तथा बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जुड़ी हैं। कई शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन उनकी समस्याओं को सुनने तक को तैयार नहीं है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। इन स्थितियों का सीधा असर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है। विभाग का मानना है कि अगर शिक्षकों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं किया गया, तो शिक्षण और शोध गतिविधियों की गुणवत्ता और अधिक प्रभावित हो सकती है।
शिक्षकों की शिकायतों का त्वरित निराकरण प्राथमिकता
विभाग ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों की शिकायतों के निराकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विश्वविद्यालय स्तर पर समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर हो। जानकारों के अनुसार विभाग की यह पहल शिक्षकों को राहत देने के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिकायतों के समाधान के बाद शिक्षण कार्य और सुचारु होगा तथा निजी विवि में अकादमिक वातावरण भी बेहतर बनेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों की समस्याओं को नजरअंदाज करने वाले विश्वविद्यालयों पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
